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सुख-समृद्धि बरसाने आया है कार्तिक मास, श्रद्धा-भक्ति से पूजन करने पर लक्ष्मीनारायण देते हैं मनचाहा वरदान

Published on: October 31, 2020
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भौतिक सुख-समृद्धि एवं पारलौकिक पुण्य देने वाला पावन कार्तिक मास आज शनिवार से प्रारंभ हो रहा है. इस महीने सूर्योदय से पूर्व कार्तिक स्नान करने का विशेष महत्व होता है. वहीं पुराणों ने कहा है कि दान, दीपदान, तुलसी विवाह, कार्तिक कथा कहने-सुनने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है तथा पापों का शमन होता है. रायगढ़ के पंडित कान्हा शास्त्री ने बताया कि कार्तिक माह पवित्र माना जाता है, सभी तीर्थों की तरह पुण्य फलों की प्राप्ति एक इस माह आसानी से मिल सकती है. क्यूंकि इस माह में की गई पूजा तथा व्रत से ही तीर्थयात्रा के बराबर शुभ फलों की प्राप्ति हो जाती है. इस माह के महत्व को स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण आदि प्राचीन ग्रंथों ने भी बताया है.

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स्नान का है विशेष महत्व

माना जाता है कि कार्तिक माह में सूर्य तथा चन्द्रमा की किरणें मनुष्य के मन तथा मस्तिष्क को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं. वहीं कार्तिक माह में किए स्नान का फल एक हजार बार किए गंगा स्नान के समान तथा सौ बार माघ स्नान के समान होता है. वहीं वैशाख माह में नर्मदा नदी पर करोड़ बार स्नान के बराबर होता है. जो फल कुम्भ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वही फल कार्तिक माह में किसी पवित्र नदी के तट पर स्नान करने से मिलता है. इस माह में गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। भोजन दिन में एक समय ही करना चाहिए. जो व्यक्ति कार्तिक के पवित्र माह के नियमों का पालन करते हैं, वह वर्ष भर के सभी पापों से मुक्ति पा जाते हैं. धार्मिक कार्यों के लिए यह माह सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

आश्विन शुक्लपक्ष से कार्तिक शुक्लपक्ष तक पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करना श्रेष्ठ होता है. वहीं स्नान कर लक्ष्मी-नारायण, शिव, चण्डी, सूर्य तथा अन्य देवों के मंदिरों में दीप जलाने तथा प्रकाश करने का बहुत महत्व माना गया है. इस माह में भगवान विष्णु का पुष्पों से अभिनन्दन करना चाहिए. ऐसा करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है. कर्तिक माह की षष्ठी को कार्तिकेय व्रत का अनुष्ठान किया जाता है. स्वामी कार्तिकेय इस माह के देवता हैं. इस दिन अपनी क्षमतानुसार जरूरतमंद व्यक्ति को दान भी करना चाहिए. सुबह स्नान करने के बाद राधा-कृष्ण का पूजन तुलसी, पीपल, आंवले आदि से करना चाहिए. वहीं सायंकाल में भगवान विष्णु की पूजा, दीपदान करना चाहिए. बहुत से श्रद्धालु कार्तिक माह में तारा भोजन भी करते हैं, अर्थात व्रती पूरे दिन निराहार रहकर रात्रि में तारों को अर्ध्य देकर भोजन करते हैं.

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पुराणों ने भी बताई है महिमा

कार्तिक मास में भगवान कृष्ण के सानिध्य में रहना तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष पुण्यदायी होता है. वहीं पद्म पुराण में कहा गया है कि कार्तिक मास में मात्र एक दीपक अर्पित करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं. भगवान कृष्ण ऐसे व्यक्ति का गुणगान भी करते हैं जो दीपक जलाकर अन्यों को अर्पित करने के लिए देते हैं.

स्कंदपुराण ने कहा है कि

मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः।

तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ।

अर्थात्‌ भगवान विष्णु एवं विष्णुतीर्थ के सदृश ही कार्तिक मास श्रेष्ठ और दुर्लभ होता है.

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