नई दिल्ली. हिंदू मान्यताओं में सूर्य को जल देने की महिमा बताई गई है. वैदिक काल से ही उनकी उपासना होती आ रही है. विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण आदि में इसकी चर्चा विस्तार से की गई है. मान्यता है कि इनकी कृपा दृष्टि से रोग और शोक नष्ट हो जाते हैं. जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर हो उन्हें हर रोज सूर्य को जल देना चाहिए. इससे उनका आत्म विश्वास मजबूत होता है. सूर्य को बहुत सारे तरीकों से मजबूत कर सकते हैं पर अर्घ्य देने से सूर्य हर तरह से अनुकूल हो जाता है. सूर्य को देखते हुए जल चढ़ाने को अर्घ्य देना कहा जाता है. इससे सूर्य के साथ साथ नौ के नौ ग्रह मजबूत हो जाते हैं. मात्र सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की लगभग हर समस्या का समाधान किया जा सकता है.
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सूर्य को अर्घ्य देने की विधि
अर्घ्य नदी में रहकर भी दे सकते हैं और घर पर भी. उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना सर्वोत्तम होता है. इसके अलावा नवोदित रहने तक सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है. जल देने के पूर्व व्यक्ति का स्नान कर लेना जरुरी है. सूर्य को जल देते समय आपका मुख पूरब दिशा की ओर ही होना चाहिए। अगर कभी पूरब दिशा की ओर सूर्य नजर न आएं तब ऐसी स्थिति में उसी दिशा की ओर मुख करके ही जल अर्घ्य दें. सूर्य को जल देते समय आप उसमें पुष्प और अक्षत (चावल) मिला सकते हैं. साथ ही साथ अगर आप सूर्य मंत्र का जाप भी करते रहेंगे तो आपको विशेष लाभ प्राप्त होगा. अर्घ्य देते समय अगर सफेद वस्त्र धारण किए जाएं तो सर्वोत्तम परिणाम मिलेंगे. जल अर्पित करने के बाद धूप से पूजा भी करनी चाहिए.तांबे के लोटे या मिट्टी के बड़े पात्र से जल देना सर्वश्रेष्ठ है.
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