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तमिलनाडु प्रशासन ने बंधक मजदूरों को घर भेजा, यहां दलाल से पूछताछ भी नहीं कर पाई पुलिस

Published on: December 7, 2020
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पिथौरा. बसना से मजदूरी करने गए मजदूरों 14 में से 7 मजदूरों को मुक्त कराकर तमिलनाडु प्रशासन ने वापस उनके घरों को भेज दिया है. इन मजदूरों को तमिलनाडु भेजने वाले मजदूर दलाल पर पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई नहीं की है. लिहाजा अब जिले के मजदूर दलाल बेख़ौफ़ मजदूरों को अन्य प्रांतों में मजदूरी के नाम पर ले जाकर उनका शोषण कर रहे हैं. सोमवार शाम तमिलनाडु में एक कप फैक्ट्री में बंधक बनाकर प्रताड़ित हो रहे 14 में से 7 मजदूर युवक पिथौरा पहुंचे. मजदूर स्थानीय दलित आदिवासी संगठन के आयोजक राजिम तांडी के साथ थे.

इन युवकों में एक तेजकुमार ने इस प्रतिनिधि को बताया कि उन्हें क्षेत्र के एक मजदूर दलाल ने तमिलनाडु के दो लोगों को सौंपा था. उन्हें बैंगलोर में 12000 रुपए मासिक वेतन पर 8 घण्टे काम की बात कर ले गए थे पर उन्हें बैंगलोर ना ले जाकर तमिलनाडु की एक चाय कप फैक्ट्री ले गए. जहां उन्हें मात्र दो समय का खाना देकर 12-14 घण्टे काम कराया जाने लगा. जब युवकों ने महीना पूरा होने पर वेतन की मांग की तब इनकी जमकर पिटाई कर दी गई और फैक्टरी से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई थी. इस बीच एक युवक तेजराम ने अपने मोबाइल से परिजनों को अपने बंधक होने की जानकारी देते हुए उन्हें छुड़ाने की बात कही.

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बाद इनकी मां शांति बाई ने महासमुंद जाकर पूरा मामला लिखित में देकर बच्चों को छुड़ाने की गुहार लगाई थी. परिजनों की शिकायत को गम्भीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेघा टेंम्भुलकर ने बसना पुलिस को इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए थे. पर बसना पुलिस ने मजदूर दलाल निधि को ना बुलाया और न ही उनसे कोई पूछताछ की. जिससे बसना पुलिस की कार्रवाई संदेह के दायरे में है. सोमवार को तमिलनाडु से वापस अपने घरों को लौटे मजदूरों में नाबालिग भुवन यादव (17) एवं राहुल यादव (17) के अलावा तुलसी दास पनका(42), समारू दास (25), दुर्जन जगत (19), तेजराम (20) एवं सूरज दास (18) सभी निवासी ग्राम पर्रापाट शामिल हैं.

दलित आदिवासी मंच ने की सहायता

स्थानीय दलित आदिवासी मंच की राजिम तांडी ने बताया कि पुलिस कार्रवाई में देर हो रही थी लिहाजा उन्होने तमिलनाडु के उनके एक समानांतर संगठन को पूरी जानकारी दी. बाद तमिलनाडु की बंधवा मुक्ति संगठन द्वारा प्रशासन के सहयोग से जिले के सात मजदूरों को फैक्ट्री में छापा मारकर छुड़वाया. अधिकारियों द्वारा मजदूरों को 9000 रुपए प्रतिमाह की दर से सभी मजदूरों को भुगतान करवाया और 2000 रुपए यात्रा खर्च दिलवाकर वापस भेजा.

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सात मजदूर अब भी लापता

वापस आए तेजराम ने बताया कि उनके साथ के सात मजदूरों ने जब घर जाने की बात की तब उनकी बहुत पिटाई की गई और उनके मोबाइल भी छीन लिए गए उसके बाद से वे सातों मजदूर भाग गए. वे मजदूर अब तक घर नहीं पहुंचे और ना ही फैक्टरी मालिक ही उनके बारे में कोई जानकारी दे रहे हैं.

कोई कार्रवाई नहीं की : थाना प्रभारी

उक्त मामले में बसना थाना प्रभारी लेखराम ठाकुर ने इस प्रतिनिधि को बताया कि उक्त मामले में पुलिस ने अब तक मजदूर दलाल निधि से पूछताछ नहीं की है और ना ही तमिलनाडु से मजदूरों को छुड़ाने कोई टीम ही बनी है. इसका प्रस्ताव एसडीओपी को भेजा गया है.

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