नई दिल्ली. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया. जबकि कोर्ट ने अयोध्या में ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए अलग जगह जमीन देने का आदेश दिया है. राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी. साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने के भी निर्देश हैं. इसके अलावा कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया है.
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हालांकि निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह देने की अनुमति को स्वीकार कर लिया गया है. अयोध्या मामले के एक याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने फैसले पर खुशी जताई. उन्होंने कहा, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हूं. आखिरकार फैसला आ गया, मैं फैसले का सम्मान करता हूं. निर्मोही अखाड़े के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी 150 साल पुरानी लड़ाई को पहचाना, इसके लिए हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं. अदालत ने निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में उचित जगह दी है. हिंदू महासभा के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसके जरिए एकता का संदेश दिया है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हैं. हम आगे की कार्रवाई पर जल्द ही फैसला लेंगे.
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