नई दिल्ली. चीन में कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत में भी कोरोना का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है. हाल ही में भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक मीटिंग बुलाई जिसमें कोरोना के संबंधित कई अहम फैसले लिए गए. इधर, एम्स के पूर्व डायरेक्टर और मेदांता अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भले में चीन में कोविड -19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन भारत में नैचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन कवरेज के हाई रेट के कारण चीन जैसी स्थिति नहीं होगी. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि भारत में टेस्टिंग में कमी आई है. सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग सर्दी, जुकाम या बुखार आने पर इसका टेस्ट नहीं कराते हैं.
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ऐसे में अगर कोरोना के टेस्ट होते रहेंगे तो म्यूटेशन का पता चल पाएगा. उन्होंने कहा कि जब यह महामारी आई तो हमारे लोगों में इस वायरस से निपटने के लिए कोई इम्यूनिटी नहीं थी, जिस कारण कुछ लोगों को इस दौरान गंभीर इंफेक्शन का सामना करना पड़ा. लेकिन अब, कोरोना महामारी को लगभग 3 साल हो गए हैं, और अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहां हमारे लोगों में नेचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन कवरेज की दर बहुत ज्यादा है. उन्होंने बताया कि हमारे लोगों की इम्यूनिटी इतनी ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो गई है कि कोई भी नया वायरस हमें गंभीरता से प्रभावित नहीं कर सकता.
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