पंडित कान्हा शास्त्री
शिव परिवार में अद्भुत विशेषता है. विभिन्नताओं में एकता और विषमताओं में संतुलन यह शिव परिवार से ही सीखा जा सकता है. शिव परिवार के हर सदस्य के वाहन या उनसे जुड़े प्राणियों को देखें तो सिंह और बैल को एक घाट पानी पीने का दृश्य भी दिखाई देता है. शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, मगर शिवजी के तो आभूषण ही सर्प हैं. वैसे स्वभाव से मयूर और सर्प दुश्मन हैं. इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है. पार्वती स्वयं शक्ति हैं जगदम्बा हैं, जिनका वाहन शेर है. मगर शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है. बेचारे बैल की सिंह के आगे बिसात ही क्या?
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परंतु नहीं, इन दुश्मनियों और ऊंचे-नीचे स्तरों के बावजूद शिव का परिवार शांति के साथ कैलाश पर्वत पर प्रसन्नतापूर्वक समय बिताता है. कहते हैं कि शिव-पार्वती चौपड़ भी खेलते हैं, भांग भी घोटते हैं. गणपति माता-पिता की परिक्रमा को विश्व-भ्रमण के समकक्ष मानते हैं. स्वभावों की विपरीतताओं, विसंगतियों और असहमतियों के बावजूद सब कुछ सुगम है, क्योंकि परिवार के मुखिया ने सारा विष तो अपने गले में थाम रखा है. विसंगतियों के बीच संतुलन का सर्वात्कृष्ट उदाहरण है शिव-परिवार. जिस घर में शिव परिवार का चित्र लगा होता है वहां पारिवारिक एकता, प्रेम और सामंजस्यता बनी रहती है.
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