नई दिल्ली. कर्नाटक के हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया और इस मामले पर दोनों जजों की राय अलग-अलग है. बाद इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित के पास भेज दिया गया है और उनसे बड़ी बेंच में सुनवाई का आग्रह किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों का फैसला अलग होने के बाद कर्नाटक हिजाब बैन पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा और अगले आदेश तक हिजाब पर बैन भी जारी रहेगा. कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता ने पहले अपना फैसला पढ़ा और कहा कि वो कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका को खारिज कर रहे हैं.
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वहीं, जस्टिस सुधांशु धूलिया की राय अलग है और उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई थी. जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय में अनिवार्य धार्मिक प्रथा की अवधारणा पर मुख्य रूप से जोर दिया, जो विवाद का मूल नहीं है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने गलत रास्ता अपनाया और हिजाब पहनना अंतत: पसंद का मामला है, इससे कम या ज्यादा कुछ और नहीं. बता दें कि 24 मार्च को याचिकाकर्ता कर्नाटक हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच में 10 दिनों तक बहस चली. दस दिन चली सुनवाई के बाद 22 सितंबर को पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.








