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रेमडेसिविर के नए प्रोटोकॉल पर हाईकोर्ट की टिप्पणी- ऐसा लगता है केंद्र चाहता है लोग मरते रहें

Published on: April 29, 2021
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नई दिल्ली. कोरोना संकट को लेकर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर केंद्र पर सख्त टिप्पणी की है. हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि केंद्र चाहता है कि लोग मरते रहें क्योंकि Covid-19 के इलाज में रेमडेसिविर के इस्तेमाल को लेकर नए प्रोटोकॉल के मुताबिक केवल ऑक्सजीन पर आश्रित मरीजों को ही यह दवा दी जा सकती है. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने केंद्र सरकार से कहा कि यह गलत है. ऐसा लगता है दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं हुआ है. अब जिनके पास ऑक्सीजन की सुविधा नहीं है उन्हें रेमडेसिविर दवा नहीं मिलेगी. ऐसा प्रतीत होता है कि आप चाहते हैं लोग मरते रहें. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्र ने रेमडेसिविर की कमी की भरपाई के लिए प्रोटोकॉल ही बदल दिया है.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह सरासर कुप्रबंधन है. बता दें कि अदालत Covid-19 से संक्रमित एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उन्हें रेमडेसिविर की छह खुराकों में केवल तीन खुराकें ही मिल पाई थीं. अदालत के हस्तक्षेप के कारण वकील को मंगलवार (27 अप्रैल) रात बाकी खुराक मिल गई. सुनवाई के दौरान एडवोकेट मल्होत्रा ने कोर्ट को बताया कि यहां हर चीज ब्लैक में बिक रही है. मैंने अपनी मां के लिए 5 लाख में एक इंजेक्शन खरीदा है. रेमेडिसविर 35 हजार से 40 हजार में बेचा जा रहा है. अदालत ने कहा, ब्लैक मार्केटिंग को लेकर हम कुछ करेंगे.

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