नई दिल्ली. गुजरात के मोरबी पुल हादसे पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने पुल की मरम्मत के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने के तरीकों की आलोचना की. कोर्ट ने पुल हादसे को लेकर कहा कि हमें होशियारी मत दिखाइए, सवालों के जवाब दीजिए. कोर्ट ने पुल की मरम्मत के लिए ठेका देने के तरीकों पर भी सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने मुख्य सचिव को तलब कर पूछा है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए टेंडर क्यों नहीं आमंत्रित किए गए थे. प्रधान न्यायाधीश अरविंद कुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी पूछा कि इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए समझौता मात्र डेढ़ पेज में कैसे पूरा हो गया. बता दें, मोरबी पुल हादसे में 135 लोगों की जान चली गई थी व अन्य कई घायल हो गए थे.
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बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान लिया था और छह विभागों से जवाब तलब किया था. सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मोरबी पुल ढहने की घटना की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग के गठन की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने पर सहमत हो गया है. मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने जनहित याचिका दायर करने वाले वकील विशाल तिवारी की इस दलील पर गौर किया कि मामले की तत्काल सुनवाई की जरूरत है. बेंच ने पूछा कि हमें कागजात देर से मिले. हम इसे सूचीबद्ध करेंगे. अत्यावश्यकता क्या है. वकील ने कहा कि इस मामले में अत्यावश्यकता है क्योंकि देश में बहुत सारे पुराने ढांचे हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि मामले को प्राथमिकता से सुना जाए.
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