नई दिल्ली. निर्भया कांड के चार दोषियों को 22 जनवरी को सुबह सात बजे फांसी की सजा दी जानी है इसके लिए तिहाड़ जेल में तैयारियां भी पूरी की जा चुकी हैं. लेकिन एक संगठन ने इन दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाए जाने के पहले इन्हें गरुण पुराण सुनाए जाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि हिन्दू धार्मिक परम्परा में माना जाता है कि मृत्यु से पूर्व गरुण पुराण सुनने से लोग मृत्यु के लिए स्वयं को मानसिक रूप से तैयार कर पाते हैं. साथ ही, इससे उन्हें कष्ट कम होता है और उन्हें मौत के बाद सद्गति मिलती है. संगठन ने इसके लिए तिहाड़ जेल के डिजी संजीव गोयल को पत्र लिखकर दोषियों को गरुण पुराण सुनाए जाने की अनुमति देने का निवेदन भी किया है.
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जेल सुधारों के लिए काम कर रही संस्था राष्ट्रीय युवा शक्ति के अध्यक्ष प्रदीप रघुनंदन ने एक मीडिया को बताया कि दोषियों को उनके किए की सजा दिए जाने की सारी प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं. अब जबकि उनका मरना निश्चित हो गया है, उन्हें ऐसी मृत्यु देने की कोशिश की जानी चाहिए जो कम से कम कष्टकारी हो. गरुण पुराण सुनने से मृतक और उसके परिवार मृत्यु के बाद की परिस्थिति के लिए स्वयं को मानसिक रूप से बेहतर ढंग से तैयार कर पाते हैं. धार्मिक व्यवस्था में माना जाता है कि इससे उनको मृत्यु के बाद बेहतर काल देखने को मिलता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए उनकी मांग है कि मानवीय आधार पर फांसी दिए जाने से पूर्व उन्हें गरुण पुराण सुनाए जाने की अनुमति दी जानी चाहिए.
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