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ब्लैक फंगस का सबसे बड़ा कारण स्टेरॉयड, डायबिटीज और कोविड मरीजों को ज्यादा खतरा

Published on: May 15, 2021
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नई दिल्ली. एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच फैल रहे ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) संक्रमण की स्थिति पर बात की. उन्होने कहा कि फंगस इंफेक्शन पहले बहुत रेयर था. यह उन लोगों में दिखता था जिनका शुगर बहुत ज्यादा हो, डायबिटीज अनकंट्रोल है, इम्युनिटी बहुत कम है या कैंसर के ऐसे पेशंट्स हैं जो कीमोथैरपी पर हैं. लेकिन आज इसके ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. उन्होने कहा कि स्टेरॉयड्स का ज्यादा इस्तेमाल करने से ब्लैक फंगल के मामले आ रहे हैं. डॉ. गुलेरिया ने बताया कि वर्तमान में इस फंगल संक्रमण (म्यूकरमाइकोसिस) से पीड़ित 23 मरीजों का एम्स में इलाज चल रहा है.

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इनमें से 20 मरीज अभी भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और बाकी लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों में म्यूकरमाइकोसिस के 500 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. उन्होने कहा कि ब्लैक फंगस चेहरे, नाक, आंख की ऑर्बिट या दिमाग को प्रभावित कर सकता है जिससे देखने की क्षमता भी जा सकती है. यह फेफड़ों तक भी फैल सकता है. स्टेरॉयड्स इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है. डायबिटीज व कोरोना से पीड़ित और स्टेरॉयड लेने वालों को इससे संक्रमित होने की आशंका ज्यादा रहती है. डॉ. गुलेरिया ने कहा कि द्वितीयक संक्रमण (फंगल और बैक्टीरियल) अधिक मृत्यु दर का कारण बन रहे हैं. उन्होने कहा कि टीकाकरण अभियान को तेज करने की तैयारी चल रही है और अगले दो महीनों में और अधिक टीके उपलब्ध होंगे.

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