पिथौरा. नगर से मात्र 20 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ वन विकास निगम बार नयापारा परियोजना मंडल में आग ने भारी तबाही मचाते हुए सैकड़ों चट्टे जलाऊ और अनेक सागौन के लट्ठों को अपनी चपेट में ले लिया है. एक अनुमान के अनुसार इस अग्निकांड में करीब 40 से 50 लाख की जलाऊ एवं स्वर्ण काष्ठ जलाऊ जलकर राख हो गई है. बुधवार दोपहर निगम क्षेत्र में तीन दिनों से लगातार अग्नि तांडव जारी रहने की खबर मिलते ही इस प्रतिनिधि ने घटना की जानकारी ली.
घटना के संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि छग वन विकास निगम बार नयापारा परियोजना परिक्षेत्र अंतर्गत रवान परिक्षेत्र में विगत 3 दिनों से कई स्थानों पर भारी आग लगी हुई है. आग लगने से शासन को लाखों का नुकसान पहुंचा है. हालांकि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा तो पता नहीं पर प्रथम दृष्टया देखने से यह लगता है कि करीब पचास लाख से भी ऊपर की इमारती सागौन लकड़ी, जलाऊ चट्टा जलकर राख हो गए हैं.
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प्रतिवर्ष होती है कटाई
ज्ञात हो कि वन विकास निगम द्वारा हर वर्ष वन विकास निगम द्वारा तैयार चिन्हित पेड़ों के कुप कटाई करते हैं. इस वर्ष प्रत्येक बीट में भारी कटाई हुई है. जिसके तहत राष्ट्रीयकृत स्वर्णकाष्ठ सागौन सहित, मिश्रित प्रजाति वृक्ष की कटाई की गई थी. आसपास के प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में अनेक स्थानों पर सागौन लट्ठा, जलाऊ लकड़ियां जलकर खाक हुई हैं. इसमें वन विकास निगम के रवान रेंज के अंतर्गत ग्राम दलदली के पास सागौन जंगल भी शामिल है जो पूरी तरह जलकर राख हो गई है.
इसी तरह रवान से रायतुम मार्ग गाजार्डीह, कोहबहरा, मुरमडीह में भी भारी नुकसान हुआ है. ग्राम मोहदा के पास बालमदही नाला एवं बल्दाकछार मार्ग पूरी तरह से जलकर राख हो गए हैं. जंगल में पड़े बल्ली, लट्ठा, गोला,, डेंगरी, जलाऊ चट्टा हजारों, लाखों की संख्या में जल चुके हैं जिसका सही मायने में मूल्यांकन किया जाए तो लाखों-करोड़ों में होगा.
एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं
ग्रामीणों के अनुसार वन विकास निगम द्वारा अग्नि सुरक्षा हेतु एक भी पहरी चौकीदार फायर वाचर की नियुक्ति नहीं की गई है. वहीं विभागीय अधिकारी अभी भी तेंदूपत्ता ठेकेदारों पर ही आरोप लगाने तैयार हैं किंतु इस वर्ष 1 माह पहले बूटा कटाई हो चुकी है ऐसे में यह कैसे संभव होगा.
निगम क्षेत्र में अधिकारी न कर्मचारी
वन विभाग का सबसे महत्वपूर्ण विभाग वन विकास निगम को माना जाता है जिसके जिम्मे सागौन एवं अन्य जलाऊ और इमारती लकड़ियों को कटवाकर तैयार कर नीलम हेतु काष्ठागार तक पहुंचाना होता है. पर इस घटना के बाद से आग बुझाने के लिए ग्रामीण भी निगम अफसरों एवं कर्मियों को तलाश रहे हैं पर कोई भी अफसर कर्मी ड्यूटी में नहीं थे. सूत्रों के अनुसार सभी विभागीय अफसर अपने राजधानी स्थित बंगलो में निवासरत हैं.
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कार्यालय बंद रहता है
ग्रामीणों के अनुसार रवाब में वन विकास निगम का कार्यालय भी है पर यह कार्यालय महीनों से बन्द है. निगम अफसर राजधानी एवं महासमुंद में बैठकर ही अपनी जंगल ड्यूटी कर रहे हैं जिसका खामियाजा उक्त अग्निकांड से शासन को 50 लाख से अधिक का नुकसान से भुगतना पड़ा.
अभी भी धुआं उठ रहा.
ग्रामीणों ने बताया कि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक अनेक स्थानों पर आग की लपटें और धुआं-धुआं दिखाई दे रहा है इससे यह पता चलता है कि आग लगना अनवरत जारी है.
दो ग्रामीणों को लगाया गया
बताया जाता है कि जंगल के बहुत बड़े क्षेत्र में भयानक अग्निकांड के नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा दो ग्रामीणों को मजदूरी में लगाया गया है. कुछ ग्रामीणों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस वर्ष काफी संख्या में कटाई हुई थी जिससे करीब 500 चट्टा जलाऊ और भारी मात्रा में सागौन के लट्ठे जंगल में ही पड़े थे जो कि अग्निकांड की भेंट चढ़ गए हैं.

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