नई दिल्ली. दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा की जाती है. यह प्रकृति की पूजा है जिसका आरम्भ श्री कृष्ण ने किया था. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन और गाय की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन प्रकृति के आधार, पर्वत के रूप में गोवर्धन की पूजा की जाती है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा करने से व्यक्ति पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है.
गोवर्धन पूजा का मुहूर्त
दोपहर 03:23 से शाम 05:36 तक
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गोवर्धन पूजा की विधि
आज गोवर्धन पूजा करने के लिए आप सबसे पहले घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाएं. इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल और दीपक जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें. कहा जाता है कि इस दिन विधि विधान से सच्चे दिल से गोवर्धन भगवान की पूजा करने से सालभर भगवान श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है.
प्रसाद बनाएं कुछ ऐसा
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है. स्मृतिकौस्तुभ के पृष्ठ 174 पर इसका जिक्र मिलता है. इस दिन घरों व मन्दिरों में अन्नकूट के रूप में कढ़ी, चावल, बाजरा और हरी सब्जियां मिलाकर बनाया गया भोजन खाने की और प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है. कहते हैं आज के दिन जो व्यक्ति गोवर्धन के प्रसाद के रूप में ये सब चीज़ें खाता है और दूसरों को भी खिलाता है या दान करता है, उसके घर में अन्न के भंडार हमेशा भरे रहते हैं. भविष्योत्तर पुराण के पृष्ठ- 140-47-73 पर भी चर्चा है कि इस दिन किया गया दान अक्षय हो जाता है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है.











