रजिंदर खनूजा
पिथौरा. महासमुंद जिले से लगे बलौदाबाजार जिले के सोनाखान इलाके में वेदांता लिमिटेड को सोना खदान के पूर्वेक्षण के लिए अनुमति हेतु वन विभाग ने आपत्ति लगाई है. वन अफसरों का मानना है कि इस क्षेत्र में दुर्लभ वन संपदा है जिसके नष्ट होने से यह दोबारा सम्भव नहीं है इसलिए यहां खनन की अनुमति हेतु अनापत्ति नहीं दी जा सकती. ज्ञात हो कि वेदांता द्वारा करीब 144.60 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति हेतु राज्य शासन से अनापत्ति की मांग की है. उक्त मामले में विगत दिनों वन विशेषज्ञों एवं वन अधिकारियों की एक टीम ने सम्बंधित क्षेत्र का सर्वे कर उक्त क्षेत्र में खनन नहीं दिए जाने की सिफारिश वन विभाग से की है.
विभाग ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में इस क्षेत्र को वेरी डेंस कैटेगरी का हिस्सा मानते हुए कहा है कि यहां कई दुर्लभ प्रजातियां उपलब्ध हैं साथ ही यह बारनवापारा अभ्यारण्य के विस्तार वाला इलाका है. इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी करीब दो सौ हेक्टेयर क्षेत्र में पूर्वेक्षण पर रोक लगाई थी. केंद्र ने इस इलाके को इको सेंसिटिव जोन माना था. वन विभाग ने पूर्वेक्षण के पर्यावरणीय प्रभाव का आंकलन किए जाने के लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने पांच बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट बताती है कि प्रस्तावित इलाके में करीब 144 हेक्टेयर क्षेत्र ऐसा है, जो न केवल बारनवापारा अभ्यारण्य के प्रस्तावित विस्तार वाला इलाका है, बल्कि यहां कई दुर्लभ और विशिष्ट प्रजातियां मौजूद हैं. टॉप प्रजाति में बहेरा, तेंदू, साजा, महुआ, कुसुम समेत करीब 20 प्रजातियां उपलब्ध है.
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क्षेत्र में विविध प्रकार के क्लाइम्बर्स हैं और मुख्य प्रजातियों सहित यहां हर्ब्स का रिजनरेशन स्टेटस अच्छा है. इलाके में भालू, हिरण की प्रजातियों की अच्छी संख्या है. रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र में प्रस्तावित बोरहोल्स तक पहुंचने के लिए बड़ी तादात में पेड़ों की कटाई और सफाई किए जाने की बाध्यता उत्पन्न होगी. जो कि वनों एवं वन्य प्राणियों के लिए अत्यधिक नुकसानदेह है. ज्ञात हो कि साल 2016 में देश में सोने की खदान का पहला कमर्शियल आक्शन किया गया था. सबसे ऊंची बोली लगाने पर सोना खदान के पूर्वेक्षण का काम वेदांता ग्रुप को दिया गया. पहले वन विभाग ने 608 हेक्टेयर के माइनिंग क्षेत्र में से केवल 400 हेक्टेयर में पूर्वेक्षण की अनुमति दी थी. हालांकि तब खनिज विभाग ने खदान क्षेत्र को अभ्यारण्य से काफी दूर कहते हुए इलाके को बैरन एरिया बताया था.
राज्य के खनिज विभाग को 650 हेक्टेयर में फैली खदान में से 608 हेक्टेयर में सोना मिलने की उम्मीद है. पूर्वेक्षण के बाद वेदांता लिमिटेड से निकलने वाले प्रति 31.10 ग्राम सोने के बदले 74,712 रुपए की दर से रायल्टी सरकार को मिलने की बात कही गई थी. आईबीएम के द्वारा तय दर की 12.55 प्रतिशत की कीमत पर यह नीलामी की गई. सोना खदान के पूर्वेक्षण को लेकर किए गए आक्शन से सरकार को करीब 2700 किलो यानी 27 क्विंटल सोना मिलने का अनुमान जताया है. पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले समाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर हो रहे विरोध के बाद भूपेश सरकार ने जनवरी 2019 में खदान के पूर्वेक्षण के लिए आबंटित किए लीज पर रोक लगा दी थी. पर्यावरणीय जानकारों ने यह दलील दी थी कि खदान के लिए प्रस्तावित वन क्षेत्र में तेंदुआ, भालू, बायसन, टाइगर, हिरणों की कई प्रजातियों हैं, साथ ही यह हाथियों का विचरण क्षेत्र भी है. खनन से वन्यजीव रहवास क्षेत्र में निगेटिव प्रभाव पड़ेगा. प्रस्तावित खनन क्षेत्र में सागौन, बास, साजा, बीजा, हल्दू महुआ, तेंदू इत्यादि प्रजातियों के लगभग दो लाख वृक्ष भी हैं.
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