नई दिल्ली. कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. यह पांच दिन चलने वाले दीपावली उत्सव का पहला दिन होता है. मान्यता है कि धनतेरस वाले दिन सोने, चांदी या तांबे के बर्तन खरीदने से घर में सौभाग्य आता है और पूरे साल धन की आवक बनी रहती है. इस दिन खरीदारी करने से घर के प्रत्येक सदस्य के ऊपर से बुरी आपदाओं का नाश होता है और किस्मत चमक जाती है. पौराणिक कहानी के अनुसार राजा हिम के पुत्र के ऊपर मृत्यु का भय था. ये भविष्यवाणी हुई थी कि विवाह के चौथे दिन राजा के पुत्र की मृत्यु हो जाएगी. विवाह के चौथे दिन जब यमराज सांप का भेष धरकर राजा के पुत्र को लेने आए तो उनकी नवविवाहिता पत्नी ने साहस दिखाते हुए कमरे के चारों तरफ दीये जला दिए और अपने सारे आभूषण और बर्तन कमरे के प्रवेश द्वार पर रख दिए.
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सोने चांदी के आभूषणों की चकाचौंध से सांप (जो कि यमराज का रूप था) की आंखे भ्रमित हो गई और वह बिना राजा के पुत्र की आत्मा को लिए चले गए. पौराणिक कथा की इसी मान्यता के अनुसार धनत्रयोदशी वाले दिन बर्तन या फिर सोने चांदी के आभूषण खरीदने का विधान है. कहते हैं कि बर्तनों को खरीदने से परिवार के हर सदस्य के ऊपर से बीमारी और आपदाओं का संकट कट जाता है और सौभाग्य घर में आता है. धनतेरस के शुभ दिन पर केवल तांबे या सोने-चांदी के आभूषण या बर्तन खरीदने चाहिए. अगर आप इस दिन कांच या प्लास्टिक के सामान खरीदते हैं तो दुर्भाग्य साथ आता है. इसके साथ ही धारदार सामान जैसे कैंची, चाकू भी इस दिन नहीं खरीदने चाहिए.
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