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जैन साध्वी पुष्पा श्री जी मसा का 4 दिवसीय जन्म शताब्दी पर्व आज से

Published on: December 12, 2021
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महासमुंद. बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम मुनगासेर में पली बढ़ी पतासी बाई का आज अपने उम्र के 100वें वर्ष के पड़ाव पर जन्मशताब्दी पर्व मनाया जाएगा. वे आज सांखला परिवार और श्रीश्रीमाल परिवार की पतासी नहीं, जैन सम्प्रदाय के खरतरगछ संघ की सबसे उम्रदराज जैन साध्वी पुष्पा श्री जी मसा हैं. अरिहंत जैन ने बताया कि महराज साहब का लालन पालन, विवाह, दीक्षा बागबाहरा में ही हुआ है, 64 वर्ष के अपने साध्वी जीवन में देश के कोने-कोने में अपने अनुयायियों को धर्मलाभ कराने के बाद अस्वस्थता के चलते पिछले 8 वर्ष से बागबाहरा के विमलनाथ जैन मंदिर में विराजित हैं. उनके 100वें जन्मदिवस के अवसर को जन्मशताब्दी वर्ष का भव्य रुप देकर चार दिवसीय आयोजन स्थानीय जैन मंदिर में आयोजित है.

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मुनगासेर, बोड़रीदादर के सांखला परिवार की बेटी और बागबाहरा के श्रीश्रीमाल परिवार की बहू पतासी बाई का जन्म इंदौर के करोन्दिया में पिता शिवलाल जी व माता केसरबाई के आंगन में हुआ, उनके चार भाई थे. व्यवसाय के सिलसिले में शिवलाल जी अपने भाई रानीदान जी के साथ छुईखदान आए जहां से वे बागबाहरा आकर समीप के ग्राम मुनगासेर व बोड़रीदादर को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और कृषि कार्य और व्यवसाय करने लगे. आज भी इनके परिवार के सदस्य इन्हीं गांवों में निवासरत हैं और कुछ व्यापार को आगे बढ़ाने बागबाहरा, महासमुंद और खरियाररोड में स्थापित हो गए.11 वर्ष की उम्र में पतासी बाई का विवाह बागबाहरा के ख्यातनाम व्यवसायी परिवार में जमनालाल जी श्रीश्रीमाल के साथ बोड़रीदादर में सम्पन्न हुआ. पति के निधन के बाद काफ़ी वर्ष ससुराल में बिताने के बाद किसी मंदिर में हुए एक पल के घटनाक्रम ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी और उन्होने जैन साध्वी बनने का निर्णय लिया. फ़िर 36 वर्ष की उम्र में रति श्री जी मसा को अपना गुरु मान वे साधु जीवन की कठिन राह पर चल पड़ी. उनकी दीक्षा बागबाहरा में हुई थी और यहां से शुरु हुआ पतासीबाई का पुष्पा श्री जी मसा का सफ़र. पहला चातुर्मास राजनांदगांव फ़िर नागपुर, जलगांव, इन्दौर सहित देश के विभिन्न नगरों का विचरण कर जैन धर्म का प्रचार कर हजारों-लाखों अनुयायियों को धर्मलाभ कराते हुए राजस्थान पहुंचें. अभी वर्तमान में वे पिछले 8 वर्षों से अस्वस्थता की वजह से बागबाहरा नगर के विमलनाथ जैन मंदिर में विराजित हैं.

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उनके साथ समत्वबोधि जी मसा और शुद्धबोधि जी मसा भी यहां विराजित हैं. स्थानीय जैन समाज के लोग व उनके अनुयायी लगातार धर्मलाभ ले रहे हैं. संयमित जीवन शैली और सामान्य आहारचर्या के कारण 100 वर्ष की उम्र में पहुँच चुकी पुष्पा श्री जी मसा के चेहरे पर तेज देखते ही बनता है. जैन श्री संघ बागबाहरा के राजकुमार सर्राफ़ ने बताया कि उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में 12 दिसम्बर को दोपहर पिकनिक एकासना, रात्रि प्रभु भक्ति, 13 दिसम्बर सुबह 9:30 बजे रत्नत्रय पूजा, दोपहर प्रभु प्रसादी, रात्रि 7:30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम, 14 दिसम्बर सुबह 9 बजे से गुणानुवाद (सामूहिक सामायिक), रात्रि 7:30 बजे से मंगल गीत, 15 दिसम्बर सुबह 9:30 बजे स्नात्र पूजा का आयोजन रखा गया है.

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