नई दिल्ली. कोरोना के बीच संसद के पहले सत्र (मानसून) का आज चौथा दिन है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-चीन बॉर्डर पर हालात के बारे में राज्यसभा को जानकारी दी. उन्होने कहा कि शांति बहाल करने के लिए कई समझौते किए गए. चीन औपचारिक सीमाओं को नहीं मानता है. उसकी कथनी और करनी में फर्क है. हमारे जवानों ने गलवान घाटी में चीन को भारी क्षति पहुंचाई है. रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन की किसी भी कार्रवाई का हम जवाब देंगे. चीन की ओर से उकसाने की कार्रवाई हुई है. एलएसी पर चीन की किसी भी कार्रवाई का जवाब देने के लिए हमारी सेना तैयार है. राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सेनाएं सीमा पर मजबूती के साथ डटी हुई हैं. भारत की तरफ से पहले सैन्य कार्रवाई नहीं की गई, जबकि चीन की तरफ से की गई है, लेकिन हमने उनके इरादों को कामयाब नहीं होने दिया.
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उन्होने कहा कि हम इस मुद्दे को शांतिपूर्वक ढंग से सुलझाना चाहते हैं और हम चाहते हैं कि चीनी पक्ष हमारे साथ मिलकर काम करें. राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों ने स्पष्ट रूप से नियमों का पालन किया है, जबकि चीन इससे पीछे हटा. उन्होने कहा कि चीन की कार्रवाई हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों की अवहेलना है. चीन द्वारा सैनिकों की कार्रवाई 1993 और 1996 के समझौतों के खिलाफ है. वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान और कड़ाई से निरीक्षण करना सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति का आधार है. राजनाथ सिंह ने कहा कि सदन के माध्यम से मैं, 130 करोड़ देशवासियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम देश का मस्तक झुकने नहीं देंगे. यह हमारा, हमारे राष्ट्र के प्रति दृढ संकल्प है. उन्होने कहा कि हमारे जवानों का जोश एवं हौसला बुलंद है, और हमारे जवान किसी भी संकट का सामना करने के लिए तैयार हैं. उन्होने कहा कि यह सच है कि हम लद्दाख में एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन साथ ही मुझे पूरा भरोसा है कि हमारा देश और हमारे जवान इस चुनौती पर खरे उतरेंगे.
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