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भारत में अचानक क्यों हुआ कोरोना विस्फोट? WHO की वैज्ञानिक ने बताई वजह

Published on: May 10, 2021
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस से मच रही तबाही के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने भारत में कोरोना के विस्फोट की वजह बताई है. उन्होने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में पहली बार भारत में डिटेक्ट हुआ कोविड-19 का B.1.617 वेरिएंट स्पष्ट रूप से भारत में तबाही का प्रमुख कारक था. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ये भारत में फैल रहे वेरिएंट में सबसे तेजी से फैलने वाला वेरिएंट हो सकता है. डब्ल्यूएचओ ने इसे हाल ही में ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में लिस्टेड किया है जो वायरस की कई उप-प्रजातियों, विभिन्न प्रकार के म्यूटेशन और उनकी विशेषताओं को गिनाता है. स्वामीनाथन ने कहा कि ये संकेत है कि यह वेरिएंट अपने मूल रूप से कहीं ज्यादा जानलेवा और संक्रामक है. यहां तक कि ये वेरिएंट शरीर में वैक्सीन प्रोटेक्शन को भी चकमा दे सकता है.

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उन्होंने कहा कि B.1.617 वेरिएंट चिंताजनक हो सकता है क्योंकि इसमें कुछ म्यूटेशन ऐसे हैं जो ट्रांसमिशन को बढ़ाते हैं और वैक्सीन या नैचुरल इंफेक्शन से उत्पन्न होने वाले एंटीबॉडीज को बनने से रोकते हैं. हालांकि स्वामीनाथन ने ये भी कहा कि भारत में तेजी से बढ़ते मामलों और मौतों के लिए अकेले इस वेरिएंट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बड़े पैमानें पर लोगों की भीड़ इकट्ठा होने से भी यहां हालात बदतर हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य राजनेताओं द्वारा आयोजित बड़े पैमाने पर चुनावी रैलियों को भी संक्रमण की रफ्तार के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. उन्होने कहा कि जब भारत में लोगों को लगा कि यहां कोरोना वायरस का संकट अब खत्म हो चुका है तो उन्होंने मास्क और बचाव के अन्य तरीकों को त्याग दिया. लेकिन उस वक्त भी वायरस खामोशी के साथ फैलता रहा.

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स्वामीनाथन ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस खतरे को अकेले वैक्सीन के दम पर रोकना असंभव है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है और 130 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले इस देश की कुल 2 प्रतिशत जनसंख्या को ही पूरी तरह वैक्सीनेट किया गया है. यानी देश की 70-80 प्रतिशत आबादी को वैक्सीनेट करने के लिए यहां साल नहीं तो कई महीने का समय तो लग सकता है. उन्होंने कहा कि संक्रमण की रफ्तार को कम करने के लिए भविष्य में हमें पब्लिक हेल्थ और सार्वजनिक उपायों पर निर्भर रहने की आवश्यकता है. स्वामीनाथन ने कहा कि भारत में लगातार बढ़ रहे मामले और मौतों से स्थिति न सिर्फ भयावह है, बल्कि इंफेक्शन नंबर बढ़ने से भी खतरनाक वेरिएंट के उभरने की संभावना बढ़ती है. वायरस जितना ज्यादा अपनी संख्या बढ़ाएगा और संक्रमण फैलेगा, म्यूटेशन से खतरे की संभावना भी उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी.

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