बागबाहरा. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉक डाउन किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के मद्देनजर लोग अतिआवश्यक काम से ही बाहर निकल रहे हैं. लॉक डाउन को सफल बनाने शासन-प्रशासन ने भी पूरी ताकत झोंक दी है. सरकारों ने कोई भूखा मत रहे इस बात की चिंता करते हुए राहत पैकेज की घोषणा भी की है. बावजूद ग्राम पंचायत बोड़रीदादर में तमाम अपील/आदेश/निर्देशों को धत्ता बताते हुए शुक्रवार 27 मार्च को भी मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण कराया जा रहा था. जबकि इन दिनों शासन-प्रशासन द्वारा सोशल डिस्टेंस बनाए रखने की अपील की जा रही है. बताया जा रहा है कि लोगों को घरों से निकालकर एक जगह हुजूम इकट्ठा कर संकट को आमंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है.
ग्रामीणों में इस बात की चर्चा है कि एक तरफ शासन-प्रशासन ने 21 दिन घरों में रहने का निर्देश देते हुए सभी सरकारी और निजी दफ्तर को बंद करा दिया है तो मजदूरों से सामूहिक कार्य कराए जाने से सुरक्षा चक्र टूटने का खतरा नहीं है. यदि खतरा है तो प्रशासन मनरेगा का काम चालू रख ग्रामीणों को त्रासदी की ओर क्यों धकेल रहा है. उपरोक्त संदर्भ में जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण सभी सरकारी और निजी संस्थान बंद करने का आदेश सरकार ने दिया है तो इस आदेश से स्पष्ट हो जाता है मनरेगा हो चाहे अन्य काम सब समाहित है. आदेश का पालन पंचायतों को भी करना चाहिए चूंकि मेरे ब्लॉक क्षेत्र में और अन्य जगहों पर मनरेगा का काम नहीं चल रहा है एकमात्र ग्राम पंचायत बोड़रीदादर में काम कराया जा रहा है. सरकार ने मजदूरों के लिए व्यवस्था की है किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी. यह समय सावधानी बरतने का है. शासन के आदेश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है यह जांच का विषय है. इस संबंध मे जांच कराई जाएगी यह गंभीर मसला है. कार्यक्रम अधिकारी खूबचंद से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि हमें काम बंद करने का कोई आदेश उच्चाधिकारियों से नहीं मिला है. हम नियमतः काम बंद करने का आदेश नहीं दे सकते. व्यावहारिक रुप से काम 31 मार्च तक बंद रखना चाहिए. ब्लॉक में अन्य पंचायतों मे काम बंद है.
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