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यह कैसी अफसरशाही? सच कहने पर पत्रकार के विरुद्ध प्रशासन ने दर्ज करवाई एफआईआर

Published on: April 28, 2021
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रायगढ़. कोरोना संक्रमण के इस आपातकाल में जहाँ एक ओर शासन-प्रशासन के साथ पूरे देश के पत्रकार देश को इस विषम परिस्थितियों से बाहर निकालने कंधे से कंधा मिलाकर एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर रायगढ़ जिले के लैलूँगा से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है. जिसमें संक्रमण फैलने के अंदेशे को लेकर एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित प्रशासन को जागरूक करने संबंधी समाचार प्रकाशन के बाद स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने उल्टे इसे प्रशासन का मनोबल तोड़ने जैसा कृत्य बताकर लैलूँगा थाने में संबंधित पत्रकार के खिलाफ लिखित शिकायत की है. जबकि खबर प्रकाशन के रोज ही उसी मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन की एक कार्रवाई से उस समाचार की सत्यता पर मुहर लग चुकी है और उस पूरी कार्रवाई को खबर का असर बताया जा रहा है.

बहरहाल, इस मामले को लेकर पत्रकार को ही निशाना बनाकर उसके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के बाद पूरे जिले के पत्रकारों में रोष व्यपात है. जिले भर के पत्रकारों द्वारा कड़े शब्दों में प्रशासन के इस कृत्य की कड़ी निंदा की जा रही है. दरअसल, रायगढ़ जिले में 14 अप्रैल से लगाए गए लॉकड़ाउन के बाद जिले के लैलूँगा थाना क्षेत्र के गांवों और सीमावर्ती राज्य एवं जिलों से महुआ कोचियों द्वारा पसरे लगाकर भीड़भाड़ इकट्ठा करने की खबर आ रही थी. वहीं लॉकडाउन के इस समय में सरहदी इलाकों में चल रही इस प्रकार की गतिविधियों से गांव-गांव के लोग इससे संक्रमण फैलने का अंदेशा जताते हुए काफी डरे हुए थे. जिसे संज्ञान में लेकर एक दैनिक समाचार पत्र के प्रतिनिधि आशुतोष मिश्रा ने मौका मुआयना कर इस पूरे मामले से पुलिस अधीक्षक को अवगत कराते हुए 18 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था.

बाद उसी रोज लैलूँगा तहसीलदार ने अवैध रूप से महुआ से लदी एक पिकअप वाहन और उसके मालिक की धरपकड़ कर एफआईआर दर्ज कराई. जो कि 14 अप्रैल को लगे लॉकडाउन के बाद इस मामले में अधिकारियों की पहली कार्रवाई थी. बताते चलें कि खबर में वाहनों की धरपकड़ कर उन्हें छोड़े जाने का उल्लेख किए जाने से बौखलाकर तहसीलदार ने संबंधित पत्रकार को एसडीएम आफिस बुलाकर काफी खरी खोटी भी सुनाई थी, जबकि 15 अप्रैल को अवैध महुए से लदा एक वाहन थाने तक लाकर उसे बिना किसी कार्यवाही के छोड़ दिया गया था.

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वाट्सऐप ग्रुप में वायरल एक अन्य मैसेज की आड़ में जबरन बनाया जा रहा पत्रकार को निशाना

इस पूरे मामले में पत्रकार के खिलाफ की गई कार्रवाई इसलिए विवादों से घिरी हुई है क्योंकि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वायरल किए गए मैसेज को लेकर अधिकारियों द्वारा संबंधित पत्रकार को निशाना बनाने की कोशिश की गई है. वायरल मैसेज में अधिकारियों के खिलाफ जो टिप्पणी की गई है वो 26 अप्रैल को की गई है और समाचार का प्रकाशन 18 अप्रैल के अंक में हुआ था. तहसीलदार द्वारा उस मैसेज को जरिया बनाकर पत्रकार से भड़ास निकालने की कोशिश की गई है. जबकि पत्रकार द्वारा अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की टीका टिप्पणी नहीं की गई.

पत्रकारों ने जताई गहरी नाराजगी

पत्रकार आशुतोष मिश्रा पर हुए एफआईआर पर लैलूंगा के सभी पत्रकारों ने नाराजगी जाहिर करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया, साथ ही जांच कर उचित कार्रवाई की मांग भी की है. विदित हो की विगत 27.04.2021 को लैलूंगा के एसडीएम तहसीलदार नायब तहसीलदार सीईओ जनपद पंचायत, सीएमओ नगर पंचायत द्वारा सामूहिक रूप से थाने में शिकायत की गई थी. जिसमें जितेंद्र ठाकुर एवं आशुतोष मिश्रा पर एफआईआर करने आवेदन दिया गया था. आवेदन में आशुतोष मिश्रा पर 18.04.2021 के लेख पर दैनिक समाचार पत्र में प्रशासन के विरुद्ध टिप्पणी किए जाने की बात कही गई है.

इसमें प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया गया है. ये जिक्र करते हुए थाना प्रभारी को एफआईआर करने आवेदन दिया था. साथ ही एक लेख जो व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा गया था जिसमे मिश्रा ने लिखा था कि “और जनप्रतिनिधियों का क्या? उन्हें क्या इन सब की जानकारी नहीं है फिर वो क्यों चुप्पी साधकर तमाशा देख रहे हैं मुख्यालय में जो तमाशा चल रहा है ना उससे सीधे सीधे सरकार की छवि धूमिल हो रही है,” का जिक्र किया गया। जिस पर थाना प्रभारी द्वारा भादस की धारा 353, 186, 188, 506, 34 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है.

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जिला कलेक्टर और एसपी से की जाएगी निष्पक्ष जांच की मांग

पत्रकारों ने कॉन्फ्रेस कॉल के माध्यम से चर्चा कर इस बात का विरोध करने का निर्णय लिया है. जिसमें आशुतोष मिश्रा पर हुए एफआईआर को एकपक्षीय कार्रवाई मानते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया गया. साथ ही इस कार्रवाई पर पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से चर्चा कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग का निर्णय लिया गया है. जिसकी प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल, आईजी बिलासपुर रेंज, कलेक्टर रायगढ़, पुलिस अधीक्षक रायगढ़ के साथ जिला प्रेस एसोसिएशन एवं प्रेस क्लब रायगढ़ को भी भेजा जाएगा. जिनके मार्गदर्शन में अग्रिम रणनीति तैयार की जाएगी. इस निर्णय में लैलूंगा के सभी वरिष्ठ पत्रकार शामिल रहे। वही खरसिया के पत्रकारों ने झूठी एफआईआर निरस्त करने की मांग की है.

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