रजिंदर खनूजा
पिथौरा. अर्जुनी वन मण्डल ने 3 चीतलों का शिकार कर ले जाने के लिए तैयार दो आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने में सफलता हासिल की है. वहीं दूसरी ओर प्रदेश के प्रमुख अभ्यारण्य में अब भी खुलेआम शिकार एवं चीतल, सुअर मांस की तस्करी जारी है. जिसे रोकने के प्रयास भी नहीं करना एक बड़ा सवाल बन गया है. विगत बुधवार की रात अर्जुनी वन परिक्षेत्र में पदस्थ सक्रिय रेंजर टीआर वर्मा के नेतृत्व में वन अमला रात्रि गस्त कर रहा था. इस बीच अर्जुनी परिक्षेत्र के कक्ष क्र 355 में अर्जुनी से सराईपाली वनमार्ग में कच्ची सड़क के किनारे स्थित 11000 वोल्ट करंट प्रवाहित विद्युत खम्बे से काला सेंट्रिंग तार जोड़कर जंगल के अंदर करीब 2 किलोमीटर तक कि लम्बाई में बिछाई गई थी. इसकी चपेट में 2 विशाल एवं एक शावक चीतल की करंट से मौत हो गई.
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बताया जाता है कि जब वह अमला उक्त मार्ग से रात्रि में पहुंचे तब उन्हें सड़क किनारे उक्त तीनों चीतल मृत अवस्था में रस्सी से बंधे मिले. जिसे देखते ही वन अधिकारी मामला समझ गए और आसपास आरोपियों की तलाश में जुट गए. तलाश के दौरान ग्राम अर्जुनी के दसरथ वल्द बोधन बरिहा एवं ग्राम खम्हण निवासी सुरेश वल्द भुनेश्वर भागते दिखे जिन्हें वन अमले ने पीछाकर धर दबोचा. दोनों आरोपियों ने चीतल शिकार की बात कबूल कर बताया कि वे इसे बाहर भेजना चाहते थे जिसके लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे. वन विभाग ने जंगल में लगी जीआई तार निकलवाकर जब्त कर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों पर डीएफओ आलोक तिवारी के निर्देश एवं एसडीओ यूएस ठाकुर के मार्गदर्शन में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत न्यायालय में पेश किया जहां से दोनों को जेल भेज दिया.
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इधर, बार अभ्यारण्य में शिकार, अतिक्रमण और कटाई जारी
ज्ञात हो कि अर्जुनी क्षेत्र में रेंजर टीआर वर्मा एवं एसडीओ यूएस ठाकुर की पदस्थापना के बाद से ही यहां शिकारियों, अतिक्रमणकारियों सहित अवैध वन उपज चोरी करने वालों में हड़कम्प की स्थिति है. अब तक दर्जनों मामलो में आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है. वहीं सूत्र बताते हैं कि समीप के बार अभ्यारण्य में नए एसडीओ की पदस्थापना के बाद से ही अवैध शिकार अतिक्रमण सहित अवैध कटाई में बेतहाशा वृद्धि हुई है. इनकी निष्क्रियता के कारण ही बार वन पर्यटन भी लगभग बंद होने की कगार पर है.







