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आग से हज़ारों क्विंटल धान खाक होना राष्ट्रीय सम्पदा की क्षति, प्रदेश सरकार ज़िम्मेदार : कौशिक

Published on: April 1, 2021
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मुंगेली ज़िले के गितपुरी धान संग्रहण केंद्र में लगी आग में 25 हज़ार क्विंटल धान के जल कर खाक हो जाने की घटना को बेहद गंभीर बताते हुए इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच करके सारे तथ्यों का ख़ुलासा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होने इस बड़ी घटना को राष्ट्रीय सम्पदा की क्षति का अपराध बताते हुए इसके लिए प्रदेश सरकार की बदनीयती, कुनीतियों को भी ज़िम्मेदार ठहराया है. श्री कौशिक ने कहा कि मौज़ूदा प्रदेश सरकार धान ख़रीदी के बाद संग्रहण केंद्रों से धान के उठाव की कोई समयबद्ध योजना नहीं बनाती है. यदि धान का उठाव करके समय पर कस्टम मिलिंग करा ली जाती तो ऐसी नौबत नहीं आती और प्रदेश राष्ट्रीय सम्पदा की क्षति से बच जाता.

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लेकिन प्रदेश सरकार के पास न तो कोई योजना है, न सुविचारित दृष्टिकोण है और न ही नेतृत्व में समय की महत्ता की समझ है. उन्होने कहा कि जले हुए धान में पुरानी ख़रीद का धान होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार किसानों और खेती तथा कृषि उपज को लेकर सियासी नौटंकियाँ तो ख़ूब कर रही है लेकिन जब किसानों के हित और खेती व खेती की पैदावार की रक्षा का मसला आता है तो वह पूरी तरह नाकाम सिद्ध हो रही है. श्री कौशिक ने कहा कि जो सरकार पिछले वर्ष के ख़रीदे गए धान का संग्रहण केंद्रों से उठाव नहीं करा पाई, कस्टम मिलिंग नहीं करा पाई, वह सरकार बाद में केंद्र सरकार पर मिथ्या दोषारोपण करके अनर्गल प्रलाप करती फिरती है, यही इस सरकार के दो साल के कार्यकाल का काला सच है. उन्होने कहा कि संग्रहण केंद्रों के अलावा प्रदेश सरकार इस ख़रीफ़ सत्र में ख़रीदे गए धान का अभी तक ख़रीदी केंद्रों से उठाव नहीं करा पाई है जिसके कारण ख़रीदी केंद्रों में धान खुले में पड़ा है और बारिश में भीगकर सड़ रहा है.

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प्रदेश सरकार को राष्ट्रीय सम्पदा की इस बर्बादी का कोई रंज ही नहीं है. श्री कौशिक ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार समय पर पिछले वर्ष कस्टम मिलिंग का काम करा लेती तो संग्रहण केंद्रों में ज़गह बनती और स्थानाभाव के चलते ख़रीदी का काम प्रभावित भी नहीं होता. लेकिन प्रदेश सरकार बहानेबाजी करके अपने निकम्मेपन पर पर्दा डालने का काम करती रही है. उन्होने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन काल में शराब की कोचियागिरी करती प्रदेश सरकार चाहती तो मई-जून 2020 में धान की कस्टम मिलिंग करा सकती थी, लेकिन कमीशनखोरी में मशगूल प्रदेश सरकार ने वह काम नहीं किया और उसका ख़ामियाजा हाल के बीते ख़रीफ़ सत्र में किसानों को भोगना पड़ा और अब धान के सड़ने और जलने से हो रही क्षति के तौर पर प्रदेश को भोगना पड़ रहा है.

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