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सागौन रोपण करने वाले मनीराम के पौत्र को शासन ने 25 साल पहले दी थी जमीन, पट्‌टा के लिए भटक रहीं पत्नी

Published on: December 9, 2021
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रजिंदर खनूजा

पिथौरा. छत्तीसगढ़ के मनीराम गोंड़ द्वारा लगाया गया सागौन प्लांटेशन वृक्षारोपण कार्यक्रमों के लिए एक मिसाल बन कर उभरा था. बाद शासन द्वारा सागौन प्लांटेशन के प्रेरणास्रोत्र मनीराम गोंड़ के वंशजों को भूमि का पट्टा प्रदान करने की घोषणा की थी जो कि आज 30 साल बाद भी अमल में नहीं लाया जा सका है. जानकारी के अनुसार आज से करीब 130 वर्ष पूर्व सन् 1891 में बलौदाबाजार जिला अंतर्गत देवपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम गिधपुरी में मनीराम गोंड़ ने सरई बाहुल्य वन क्षेत्र में सागौन पौधों का रोपण कर एक अभिनव प्रयोग किया था. स्व. मनीराम की देखरेख में यह सागौन प्लांटेशन प्रदेश ही नहीं, पूरे भारत देश का पहला सागौन प्लांटेशन था. अपने इस कारनामे से मनीराम देखते ही देखते नायक बन गए.

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तत्कालीन सरकारों की ओर से ऐसे नायक को जीते जी कभी भी सम्मान नहीं मिल पाया. मनीराम के वंशज जो आज भी महासमुंद जिला अंतर्गत पिथौरा ब्लॉक के कुम्हारीमुड़ा गांव में निवास कर रहे हैं. स्व. प्रेमसिंह गोंड़ उनके नाती थे जिसे सरकार ने वर्ष 1995-96 में पचास हजार रुपए एवं 10 एकड़ खेती पहनं 24 में खसरा नं 1312 का तुकड़ा रकबा 4.00 हेक्टेयर जमीन दी थी जिसका मालिकाना हक एवं पट्टा आज तक उन्हें नहीं मिल पाया है. अब शासन से प्राप्त जमीन का पट्टा लेने स्व. प्रेमसिंह की पत्नी बेवा हीराबाई (75) शासन-प्रशासन से पट्टे की मांग को लेकर चक्कर लगाते भटक रही हैं. पर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.

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ज्ञात हो कि हीराबाई के बूढ़ा ससुर मनीराम गोंड़ ने सन् 1891 देवपुर वन परिक्षेत्र के गिधपुरी गांव में सर्वोत्तम किस्म का सागौन रोपण कर करोड़ों की सम्पत्ति राष्ट्र को समर्पित की थी. उनके वंशजों के साथ इस प्रकार का व्यवहार करना अनुचित है. स्व. मनीराम गोंड़ की पुत्रवधु हीराबाई ने इस प्रतिनिधि को बताया कि अब तक किसी भी सरकार ने तत्कालीन सरकारों के वायदे निभाने के प्रयास नहीं किए. जिससे वे लगातार चक्कर लगाने मजबूर हैं. अब प्रदेश में भूपेश सरकार से अपेक्षा है कि उन्हें पट्टा मिल ही जाएगा. दूसरी ओर सर्वआदिवासी समाज के स्थानीय अध्यक्ष मनराखन ठाकुर ने भी महामहिम राज्यपाल से निवेदन किया है कि इस संबंध में राज्य सरकार को उचित कार्रवाई करने का निर्देश देने की कृपा करे.

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