बागबाहरा. गत दिनों छत्तीसगढ़ सरकार ने वनाधिकार पट्टाधारी किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य में खरीफ सीजन का धान खरीदी का फरमान जारी किया है. पर वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन करने साफ्टवेयर में व्यवस्था नहीं दिए जाने से पंजीयन अटका है. स्थानीय जनपद सभागृह में अनुविभागीय अधिकारी बागबाहरा ने गत दिनों सहकारी समिति के सभी व्यवस्थापक और प्रभारियों की बैठक आहूत कर धान खरीदी व्यवस्था के संबंध में दिशा-निर्देश दिया था कि जिन किसानों के पास पूर्व से पैतृक भू स्वामी हक की जमीन है यदि उनका पंजीयन नहीं हुआ हो तो 17 नवंबर तक आवश्यक रुप से पंजीयन करा लिया जाए ताकि कोई किसान धान बेचने से वंचित न हो. तब बैठक में वनाधिकार पट्टाधारी किसानों का पंजीयन नहीं होने की जानकारी व्यवस्थापकों ने दी.
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इस पर अनुविभागीय ने कहा कि जिन किसानों की पैतृक जमीन है उनका पंजीयन हो चुका है और वन पट्टा भी है तो ऐसे किसानों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है चूंकि साफ्टवेयर में ऐसे किसान जिनका पंजीयन हो चुका है उन किसानों को वन पट्टा दिया गया है उन्हीं का पंजीयन नहीं हो पा रहा है. शासन के निर्देश पर ही हम कुछ कर सकते हैं. जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर खाद्य विभाग ने वनाधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन हेतु साफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान किये जाने की बात कही है पर पंजीयन नहीं हो रहा है. पंजीयन की अंतिम तिथि 17 नवंबर थी पर हजारों किसान पंजीयन से वंचित हैं. व्यवस्थापकों का कहना है कि जब हम वनाधिकार पट्टा में कर्ज नहीं दे रहे थे तब अधिकारियों ने हमें बुरी तरह से फटकार लगाई थी अब कर्ज वसूली नहीं होगी तब फिर हम अधिकारियों के निशाने पर रहेंगे. वनाधिकार पट्टा पर धान खरीदी न होने से वसूली प्रभावित होगी वहीं किसानों के आक्रोश का सामना भी हमें करना पड़ेगा. वनाधिकार पट्टाधारी किसानों के पंजीयन न होने से जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट निर्देश न होने से वनाधिकार पट्टाधारी किसान समिति व्यवस्थापक, जनप्रतिनिधि के चक्कर काट रहे हैं ऐसे किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है.
सरकार कहती कुछ और करती कुछ है. मेरे जनपद क्षेत्र के सहकारी समिति कसेकेरा, नर्रा, कोमाखान, देवरी, बाघामुड़ा, खेमड़ा, गांजर, बंसुलाडबरी, खोपली, तेन्दूकोना, सिर्रीपठारीमुड़ा, दाबपाली, सुखरीडबरी, खल्लारी, मामाभांचा आदि समितियों में वनाधिकार पट्टाधारी किसान जिनके पास पैतृक जमीन है उनको जो वनपट्टा के लिए पात्रता रखते हैं ऐसे किसानों का बकायदा राजस्व और वन विभाग के संयुक्त टीम ने सर्वे किया और ग्रामसभा तथा ग्रामीण वनाधिकार समिति से अनुमोदन कराकर जिला वनाधिकार समिति के पास भेजा. जिला वनाधिकार समिति की अनुशंसा पर पात्र लोगों को पट्टा प्रदान किया गया है. अब उक्त किसानों का पंजीयन नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है जबकि पिछले वर्ष सभी वनाधिकार पट्टाधारी किसानों का पंजीयन किया गया था तो इस वर्ष पंजीयन करने साफ्टवेयर में प्रावधान क्यों नहीं रखा गया? पट्टा देने के बाद राजस्व, बड़े झाड़ और वन विभाग के बड़े झाड़, जंगल नक्शा में बटांकन क्यों नहीं? बटांकन नहीं करने का क्या कारण है?
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