बागबाहरा. जरुरतमंदों और अहसाय गरीब-मजदूर निम्न वर्ग परिवार के किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाए तो उसके बेहतर इलाज मुफ्त में करने सरकार ने अनेक योजनाएं लागू की है. पर जिले के सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टरों और स्टॉफ के कुछ सदस्यों द्वारा निजी अस्पतालों से आपसी सांठगांठ कर ग्रामीण क्षेत्र के मरीज जो सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में इलाज कराने आते हैं उन मरीजों का प्रारंभिक इलाज कर परिजनों से यह कहा जाता है कि मरीज को तत्काल निजी अस्पताल ले जाएं. यह कहते हुए अपने पसंदीदा सांठगांठ वाले अस्पताल में 108 एम्बुलेंस के माध्यम से रेफर कर भेज दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है. सरकारी 108 एम्बुलेंस द्वारा आधे रास्ते पर निजी अस्पताल के एम्बुलेंस को मंगाकर मरीज को निजी अस्पताल भेज दिया जाता है.
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यह मामला बडी लापरवाही को दर्शाता है. सरकारी एम्बुलेंस से निजी एम्बुलेंस में मरीज को डालते वक्त कोई भी अनहोनी घटना घट सकती है. इस प्रकार की हरकत से मरीज की जान जा भी सकती है. उल्लेखनीय है कि विकासखंड बागबाहरा के ग्राम नरतोरी के पामेश्वरी पति ओमप्रकाश बरिहा की 5 जून को अचानक तबीयत खराब होने से गांव के मितानिन द्वारा 108 एम्बुलेंस को सूचना देकर उस मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा इलाज के लिए भिजवाया गया. बागबाहरा पहुंचने पर मरीज का प्रारंभिक इलाज करने के बाद उक्त मरीज पामेश्वरी बाई को 108 एम्बुलेंस से जिला मुख्यालय के लिए रेफर कर दिया गया. आधे रास्ते पहुंचने के बाद महासमुंद जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल के एम्बुलेंस को मंगवाकर मरीज को एक एम्बुलेंस से दूसरे एम्बुलेंस में डालकर भेज दिया गया. इस घटना की सम्पूर्ण जानकारी मरीज के पति ओमप्रकाश ने पंचायत नरतोरी के सरपंच घनश्याम चंद्राकर को दी.
सरपंच घनश्याम चंद्राकर दो दिन बाद पामेश्वरी को देखने जिला मुख्यालय के जिस निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था वहां पहुंचे और पूरी जानकारी ली. उक्त निजी अस्पताल में प्रति दिन आठ हजार के हिसाब से मरीज से तीन दिन का चौबीस हजार रुपए लिया गया तथा दवाई का अतिरिक्त रुपए लिया गया. चूंकि मरीज मजदूर वर्ग की है तो उसे इस खर्च को वहन करने में काफी तकलीफ हुई. सरपंच घनश्याम ने निजी अस्पताल से मरीज को छुट्टी करने कहा तो निजी अस्पताल संचालक छुट्टी करने से मना करते रहे. सरपंच से जवाबदारी पत्र लिखवाकर अस्पताल से बमुश्किल से पामेश्वरी को छुट्टी दी गई. सरपंच घनश्याम चंद्राकर ने इस पूरे घटनाक्रम की सरकारी 108 रायपुर के संबंधित अधिकारी को दूरभाष के माध्यम से शिकायत की और ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ से चर्चा करते हुए पूरे घटना क्रम की जानकारी दी.
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‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ संवाददाता ने जिला चिकित्साधिकारी डॉ मंडपे को इस घटना से अवगत कराते हुए उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने इसकी जांच और दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही. सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक जिला मुख्यालय के कुछ सरकारी डॉक्टर भी मरीजों को निजी अस्पताल भेजकर स्वयं इलाज करने जाते हैं. बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बेहतर इलाज के लिए जाना जाता है, पर विगत कुछ समय से यहां के कुछ डॉक्टर और कर्मचारी निजी अस्पताल से सांठगांठ कर मरीजों को लूटने का काम कर रहे हैं. साधरण मरीज को भी रेफर कर दिया जाता है. सामान्य जचकी जो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कराई जा सकती है, उसे भी रेफर कर दिया जाता है. रेफर गर्भवती माता की नार्मल डिलवरी निजी अस्पताल में करा दी गई तो सरकारी अस्पताल में क्यों नहीं हो सकती? सामान्य डिलवरी का खर्च निजी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा 25 हजार रुपए वसूल किया गया.
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