खरसिया. विगत कुछ सालों से शिक्षा विभाग में अनवरत मनमानी का दौर चला आ रहा है. शिकायतों की झड़ी लगने पर भी उच्चाधिकारियों द्वारा बीईओ की मनमानी पर किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया जा रहा. अब नए मामले को लेकर बीईओ साहब नगर में सुर्खियां बटोर रहे हैं. ताज्जुब है कि जिनके जिम्मे शिक्षा की व्यवस्था है, वही युवाओं की शिक्षा में बाधक बन रहे हैं. बताना लाजिमी होगा कि युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूथ क्लब प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को कंप्यूटर, इंटरनेट, लाइब्रेरी, वैकेंसी की जानकारी तथा फोटोकॉपी आदि सभी सुविधाएं नि:शुल्क प्राप्त होंगी.
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वहीं यूथ क्लब में ही शिक्षा अधिकारी ने बिना किसी विज्ञप्ति अथवा विज्ञापन प्रकाशित करवाए स्कूल में अध्ययनरत नाबालिक युवाओं को कार्य पर रखा जा रहा है. वहीं इनकी नियुक्ति तथा वेतन के लिए बीईओ ने डीईओ से अनुशंसा भी की है. यदि नियमतः विज्ञप्ति प्रकाशित कर लोगों को काम पर रखा जाता तो संभव था कि जरूरतमंद एवं योग्य लोगों को कार्य प्राप्त होता. परंतु बिना किसी जानकारी के मनमाने तरीके से छात्रों को ही कर्मचारी बनाया जा रहा है. ऐसे में उनकी शिक्षा भी बाधित होगी वहीं जरूरतमंद वंचित भी रह जाएंगे.
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जिलाधीश ने दिया था मौखिक आदेश
कमाल की बात है कि नाबालिग कर्मचारियों को वेतन आबंटन हेतु खरसिया बीईओ ने डीईओ को अनुशंसा पत्र भी भेज दिया है. जनचर्चा में सुना जा रहा है कि यह मनमाना रवैया लेन-देन को लेकर ईख्तियार किया गया है. बता दें कलेक्टर भीम सिंह ने यूथ क्लब के लिए 2 कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए मौखिक आदेश दिया था. वहीं इस आदेश के परिपालन में सभी नियम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. चलाकी यह भी की गई है कि यूथ क्लब प्रारंभ होते-होते छात्र बालिग भी बन जाएंगे, परंतु क्या अध्यापन एवं कार्यालयीन कार्य दोनों एक साथ यह विद्यार्थी कर पाएंगे? अब देखना होगा कि बीईओ एवं डीईओ के इस खेल पर कलेक्टर भीम सिंह क्या एक्शन लेते हैं?







