नई दिल्ली. एल विक्टोरिया गौरी की मद्रास हाईकोर्ट की एडिशनल जज के रूप में रूप में नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. चैन्नई में कुछ वकीलों ने ईसाई और इस्लाम धर्म को लेकर विक्टोरिया के पुराने आपत्तिजनक बयानों/लेखों का हवाला देकर यह याचिका दायर की थी. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने कहा कि याचिका में जिन बातों का हवाला दिया गया है, ऐसा संभव नहीं है कि कॉलेजियम को इसकी जानकारी न हो. ऐसे में हमारे लिए ये उपयुक्त नहीं होगा कि हम कॉलेजियम को विक्टोरिया की नियुक्ति के लिए भेजी सिफारिश पर दोबारा विचार के लिए कहें.
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कोर्ट ने कहा कि अभी विक्टोरिया गौरी की एडिशनल जज के तौर नियुक्ति हुई है. अगर आगे चलकर कॉलेजियम उन्हें जज के तौर उपयुक्त नहीं पाता है तो स्थायी जज के तौर पर नियुक्ति नहीं होगी. कॉलेजियम पर तब भी उनके बारे में फैसला लेने का अधिकार होगा. दिलचस्प ये है कि जब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई चल रही थी, उसी वक्त विक्टोरिया गौरी ने एडिशनल जज के तौर पर शपथ ले ली थी. हालांकि, उनकी शपथ से पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट अपनी टिप्पणियों के जरिए साफ कर चुका था कि वो शपथ पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हैं.
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