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‘सत्तावादी संरक्षण में रेत माफ़िया प्रदेश के राजस्व को क्षति पहुँचाने के साथ ही पर्यावरण को भी नष्ट करने पर आमादा’

Published on: June 11, 2021
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कोरबा और महासमुंद ज़िलों समेत प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में शासन-प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम बेखटके हो रहे रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार के सत्तावादी संरक्षण में रेत माफ़िया सरेआम क़ायदे-क़ानूनों की धज्जियाँ उड़ाकर न केवल प्रदेश के राजस्व पर डाका डाल रहे हैं, अपितु प्रदेश की नदियों-नालों को निर्मम शोषण करने के साथ-साथ पर्यावरण को भी नष्ट करने पर आमादा हैं. श्री चंद्राकर ने कहा कि कोरबा ज़िले के कोरबा-पसान में पोड़ी-उपरोड़ा व्लॉक के ग्राम बैरा बम्हनी नदी रेत खदान में ठेकेदारों द्वारा एक तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों को ताक पर रख दिया गया है, दूसरे रायल्टी दर से चार गुना अधिक पैसा वसूला जा रहा है.

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इससे खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. उन्होने इस बात पर भी हैरत जताई कि वहाँ सुबह जिन पाँच हाईवा और एक पोकलेन को रेत के अवैध उत्खनन के मामले में जब्त किया गया था, शाम को उन्हीं हाईवा और पोकलेन को फिर रेत उत्खनन करते देखा गया. इसी प्रकार महासमुंद ज़िले के बरबसपुर रेत घाट की पर्यावरण एनओसी 13 अप्रैल को खत्म होने के बाद भी इस रेत घाट में जेसीबी और चेन माउंटेन मशीनें लगाकर दिन-रात रेत निकाली जा रही है. इसी तरह बड़गांव रेत घाट से भी नियम विरुद्ध जेसीबी मशीनें और चेन माउंटेन लगाकर दिन-रात रेत निकाली जा रही है. महानदी के इन दोनों रेत घाटों से रोजाना सैकड़ों हाईवा रेत निकालकर बड़गांव, बरबसपुर और बिरकोनी में अवैध रूप से स्टॉक किया जा रहा है. अभी आलम यह है कि यहां अलग-अलग जगहों पर 100 एकड़ से भी अधिक रकबे में करीब 40 हजार ट्रक रेत डम्प है.

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श्री चंद्राकर ने कहा कि यहां रेत डम्प करने के लिए कोई निजी भूमि, सरकारी घास भूमि नहीं बची तो औद्योगिक एरिया में फैक्ट्रियों के अंदर, बाहर और उन प्लाटों में भी रेत का अवैध स्टॉक किया जा रहा है, जो उद्योग स्थापित करने के लिए आबंटित किए गए हैं. पिथौरा क्षेत्र की प्रमुख जोंक नदी से लगातार अवैध रेत उत्खनन कर जंगलों में रेत का पहाड़ खड़ा किया जा रहा है. हरे भरे पेड़-पौधों के बीच रेत के पहाड़ खड़े होने से अब इस क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ने के कगार पर पहुंच गया है. यहां उगने वाले नए पौधे अभी से मरने लगे हैं. जोंक नदी से रेत उत्खनन सांकरा के अलावा कसडोल विकासखण्ड के ग्राम कुशगढ़ में भी हो रहा है. जोंक नदी के जिस क्षेत्र से सबसे अधिक रेत का उत्खनन किया जा रहा है, वह क्षेत्र टेमरी ग्राम पंचायत के तहत है.

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