नई दिल्ली. प्रवासी मजदूरों के मामले पर जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने गुरुवार को सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रेनों और बसों से सफर कर रहे प्रवासी मजदूरों से किसी तरह का किराया ना लिया जाए. यह खर्च राज्य सरकारें ही उठाएं. कोर्ट ने आदेश दिया कि फंसे हुए मजदूरों को खाना मुहैया कराने की व्यवस्था भी राज्य सरकारें ही करें. इस मामले पर अगली सुनवाई अब 5 जून को होगी. इससे पहले केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1 मई से 27 मई तक 3700 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई हैं, जिसके जरिए 95 लाख से ज्यादा यात्रियों का आवागमन हुआ है.
http://छत्तीसगढ़ में कोरोना के 29 नए मरीज मिले, अब 315 एक्टिव केस
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी प्रवासी मजदूर से घर जाने के लिए यात्रा का एक पैसा भी किराया न वसूला जाए. सारा व्यय राज्य वहन करें. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में यह भी कहा है कि जहां से मजदूर रेल यात्रा शुरू करें, वहां की सरकार उनके भोजन, पानी और टिकट आदि का इंतजाम करे. इसके अलावा रेल में भी उनके खाने-पीने का इंतजाम हो. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार सभी प्रवासी मजदूर यात्रियों का रजिस्ट्रेशन करे और उसके मुताबिक ही उनका ट्रेन में बैठना सुनिश्चित करे. सड़क पर पैदल जाता कोई भी मजदूर दिखे तो उसे शेल्टर होम में लाकर रखे फिर खाना-पीना देकर ट्रेन या बस से उसके गांव तक भेजने का इंतजाम करे. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की दस्ती कॉपी केंद्र और सभी राज्य सरकारों को दे दी गई है. इसके साथ ही अगले शुक्रवार तक सभी राज्यों को कोर्ट में यह रिपोर्ट दाखिल कर देनी है जिसमें मजदूरों की संख्या, उनके ट्रांसपोर्टेशन का तरीका, रजिस्ट्रेशन का तरीका, उनको दी जा रही सुविधाओं का ब्यौरा सभी कुछ होंगे.
http://कान्टेक्ट ट्रेसिंग कार्य में लापरवाही, तीन व्याख्याता निलंबित








