रायपुर. राज्य शासन ने शहरी क्षेत्रों में पट्टाधारी लोगों के पट्टों को भूमि स्वामी अधिकार में बदलने की कवायद तेज कर दी है. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पट्टाधारियों की निर्धारित सीमा तक अतिरिक्त कब्जे की जमीन के नियमितीकरण, अवैध या अनियमित पट्टा हस्तांतरण के नियमितीकरण और भू-उपयोग में परिवर्तन के नियमितीकरण कार्यों में तेजी लाने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा है. विभाग ने पट्टों के नियमितीकरण, भू-स्वामी अधिकार और पट्टा नवीनीकरण की कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि पट्टाधारी के निर्धारित सीमा तक अतिरिक्त कब्जे की भूमि के नियमितीकरण, अवैध या अनियमित पट्टा हस्तांतरण के नियमितिकरण और भूमि के प्रयोजन में परिवर्तन के नियमितीकरण का आवेदन या इस संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा शीघ्र कार्रवाई प्रारंभ की जाए.
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पट्टाधारी के अतिरिक्त कब्जा की भूमि नियमितिकरण योग्य होने पर अर्थात कब्जे के अधीन अधिक भूमि व्यवस्थापित मूल भूमि से 50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा तक नियमितीकरण किया जाएगा. इसके तहत नगर पंचायतों में 1,500 वर्गफुट, नगर पालिकाओं में 1,200 वर्गफुट और नगर निगमों में 1050 वर्गफुट भूमि का नियमितीकरण किया जाएगा. रायपुर नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम 900 वर्गफुट जमीन का नियमितिकरण किया जाएगा. पट्टाधारी द्वारा निर्धारित विकास प्रभार जमा कराए जाने पर कब्जे की अतिरिक्त भूमि को मूल पट्टाधारी के पक्ष में पट्टा प्रदान कर नियमितीकरण या भू-स्वामी अधिकार प्रदान किया जाएगा. अवैध या अनियमित हस्तांतरण और भूमि प्रयोजन में परिवर्तन के मामलों में संयुक्त दल के प्रतिवेदन, कब्जाधारी के भूमिहीन होने, अधिनियम के अंतर्गत पात्र हितग्राही होने, भूमि प्रयोजन में परिवर्तन स्वीकार्य होने और वहां प्रभावी मास्टर प्लान के उल्लंघन नहीं होने की स्थिति मे निर्धारित विकास प्रभार जमा कराने के बाद पट्टा जारी कर नियमितिकरण या भूमि स्वामी अधिकार में परिवर्तित किया जाएगा. वर्ष 1984 में दिए गए पट्टों की 30 वर्ष की अवधि पूर्ण हो चुकी है. इन पट्टों के नवीनीकरण की कार्रवाई बड़ी संख्या में लंबित है. नगरीय प्रशासन विभाग ने छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति अधिनियम-2019 के प्रावधानों के अनुसार अगले 30 वर्षों के लिए इनके नवीनीकरण के भी निर्देश कलेक्टरों को दिए हैं.
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