महासमुंद. धान खरीदी को लेकर बार-बार बदले जा रहे नियमों से किसान त्रस्त हो गए हैं. धान खरीदी केंद्र गांजर, मुनगासेर, खेमड़ा, बाघामुड़ा, देवरी, सुवरमाल के किसानों ने बताया कि पहले खरीदी लिमिट घटाई गई फिर 15 क्विंटल की बजाए 8 क्विंटल पहले और 7 क्विंटल बाद में खरीदने का फरमान जारी किया गया. अब जिला प्रशासन ने नया फरमान जारी किया है कि केवल लघु एवं सीमांत किसानों का धान पहले खरीदा जाएगा उसके बाद बड़े किसानों का नंबर आएगा. इस फरमान से बड़े किसानों में काफी निराशा और आक्रोश है. यदि बेमौसम बारिश हो गई तो किसानों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा. गांजर समिति के किसान हर्षवर्धन चंद्राकर, टीकाराम चंद्राकर, अशोक चंद्राकर, मानिकराम दीवान, नैनसिंह चक्रधारी, त्रिलोचन दीवान, कृष्णा दीवान, पुनीत सिन्हा, पीलूराम निषाद,
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भीखम चंद्राकर, चिंताराम सिन्हा आदि ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री ने खरीदी लिमिट हटाकर समितियों को अपनी व्यवस्था के अनुसार खरीदी करने के निर्देश दिए हैं वहीं प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं. गांजर समिति खरीदी के शुरुआती सप्ताह में 4 हजार कट्टा धान खरीद रही थी. उसे अचानक बंद कर 2400 कट्टा और अब नए फरमान के तहत केवल 2000 कट्टा खरीदी जा रहा है. गांजर में प्रतिदिन तीन हजार नौ कट्टा धान खरीदी होगी तभी 15 फरवरी तक सभी किसानों का धान बिक्री हो पाएगी. ऐसे में बड़े किसान जो कटाई-मिंजाई कर धान एक माह से अपने घरों में रखे हुए हैं, उनका नंबर कब आएगा. गांजर समिति के व्यवस्थापक पन्नालाल सेन से मिली जानकारी के अनुसार समिति में कुल 807 पंजीकृत किसानों के पास 1946 हेक्टेयर कृषि भूमि है. अधिकारियों के निर्देशानुसार छोटे और सीमांत किसानों का प्रतिदिन 800 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है. उक्त संदर्भ में बागबाहरा एसडीएम भागवत जायसवाल का कहना है कि सभी किसानों का धान बारी-बारी से खरीदा जाएगा. लगभग 80 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान हैं. उनका धान पहले लिया जाएगा. बड़े किसानों का धान भी 8-10 दिन के अंदर खरीदा जाएगा. छोटे किसानों की ज्यादा जरूरत और समस्या को देखते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है.
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