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ठोस कार्रवाई नहीं, बढ़ता जा रहा रेत के पहाड़ों का आकार

Published on: March 18, 2021
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ललित मानिकपुरी

महासमुंद. पारा चढ़ता जा रहा है. नदियों की रेत गर्म, और गर्म होती जा रही है. रेत की ताप खबरिया चैनलों और अखबारों के तेवर को और गर्म कर रही है. ज्यादातर चैनल और अखबारों के प्रतिनिधि इन दिनों रेत पर पसीना बहा रहे हैं और दाग रहे हैं सुलगते सवाल, जिनका कोई ठोस जवाब मिल नहीं रहा. रेत पर सवाल तो सूबे के मुखिया से भी पूछा गया, उनसे जवाब भी मिला, मग़र उनके जवाब का भी जवाब नहीं. सूबे के मुखिया मीडिया से ही कहते हैं कि आप मुझे लिखकर दें, मैं कार्रवाई करूँगा. नदियों की छाती पर दिन-रात धड़धड़ाती चेन माउंटेन मशीनें, बेधड़क हो रही रेत संपदा की लूट, कमजोर ग्रामीण सड़कों पर पचासों टन वजनी हाइवा ट्रकों के रेले, जगह-जगह बनते रेत के नाजायज पहाड़ों को देखकर ख़बरनवीस महज सवाल न करें, शिकायत-पत्र भी अपने साथ लिखकर रखें,

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ताकि किसी सिरपुर में सूबे के मुखिया मिल जाएं तो उन्हें दे सकें, कार्रवाई तभी होगी, अन्यथा नहीं. सूबे के मुखिया से सीधा सवाल और उनके जवाब से भी पता चलता कि रेत वाकई कितनी गर्म है. अब इतनी गर्म रेत पर हाथ डालने की हिम्मत ये नौकरशाह कैसे कर पाएंगे जो रेत की आंच से पहले ही पिघले हुए हैं. जांच की जाएगी, कार्रवाई की जाएगी. पिछले कई दिनों से जिम्मेदार अफ़सरानों के गले बस यही टेप बज रहा है और उधर माफियाओं के ठिकानों पर रेत के नाजायज़ पहाड़ों का आकार बढ़ता ही जा रहा है. सवाल करने वाले हैरान हैं कि इस कदर सवाल करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. सवाल करने वाले अब खुद से सवाल पूछ रहे हैं कि अब क्या सवाल पूछा जाए और किससे पूछा जाए. यही नहीं सवाल करने वालों से ही सवाल पूछा जा रहा है कि रेत के इन पहाड़ों से किसी आम आदमी को तकलीफ ही क्या है. नदी की रेत निकालकर कहीं-कहीं डम्प किया जा रहा है तो इसमें इतनी हाय-तौबा मचाने की क्या जरूरत. सवाल सिर्फ ये नहीं कि नदियों की छाती छलनी कर रेत के पहाड़ खड़े किए जा रहे हैं. सवाल ये है कि, रेत के ये नाजायज पहाड़ खड़े ही क्यों हो रहे हैं?

क्या ये माफियाओं के बुलंद हौसलों का परिचायक नहीं हैं. क्या ये पहाड़ इस बात का उद्घोष नहीं कर रहे हैं कि अवैध काम खुलेआम हो तब भी कोई बाल बांका नहीं कर सकता. आम लोगों तक क्या यह संदेश नहीं जा रहा कि माफियाओं को सत्ता का संरक्षण है. इन पहाड़ों को देखकर क्या आम लोगों में दहशत पैदा नहीं होगी. एक अवैध कारोबार पर आंख मूंदने वाला शासन-प्रशासन क्या दस अवैध कार्यों को नजरअंदाज नहीं करेगा. वैसे भी महासमुंद में रेत माफिया ही नहीं, शराब माफिया, गुटखा माफिया, पत्थर माफिया जैसे कई प्रकार के माफिया अपनी कारस्तानियों से खुद ही सुर्खियों में हैं. जब अपना मतलब साधना होता है तब पुलिस भी रेत पर कार्रवाई करने लग जाती है. बीते साल गवाह हैं.

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रेत के मामलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई पुलिस विभाग ने की थी. पर जब मतलब सध जाता है तब हर विभाग आंख-कान मूंद लेता है. ऐसे नौकरशाहों व माफियाओं के प्रति सद्भावना रखने वाले यह धारणा भी रखते हैं कि सवाल उठाने वाले भी तभी तक सवाल उठाते हैं जब तक कि उनका मतलब न सध जाए. यानी माफियाओं को तो छूट है, मग़र शासन-प्रशासन से सवाल उठाने वाले संदेह के घेरे में हैं. तभी तो सूबे के मुखिया ने भी रेत के अवैध उत्खनन और भंडारण पर पूछे गए सवाल पर ऐसे रिएक्ट किया जैसे कि शिकायत और किसी को नहीं महज इन्हें ही है. यानी जो सवाल पूछे उन्हें संदिग्ध बना दो. यह आज के दौर की सत्ताओं का आचरण बन गया है. पर इससे सवाल खत्म नहीं हो जाते. सवाल अब भी मौजूं हैं. महानदी में नियम विरुद्ध दिन-रात मशीनों से रेत खोदकर लाखों टन रेत का अवैध भंडारण क्या जनता की भलाई के लिए किया जा रहा है. या रेत माफिया ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए जमाखोरी कर रहे हैं?

नदी नाले क्या माफियाओं की जागीर हैं कि जब चाहे जितना चाहे रेत निकाल लें और जितना चाहें जमा कर लें और आगे जितनी मर्जी रेट तय कर आम लोगों को बेचें. सरकार क्या रेत की रेट तय करेगी. क्या अधिक रेट पर रेत बेचने वालों पर कार्रवाई करेगी. कार्रवाई अभी नहीं हो रही तो आगे होगी इसकी क्या उम्मीद की जाए. रेत की लूट और कालाबाजारी की छूट आम जनता पर ही भारी पड़ेगी. पर इससे न सत्ता को फर्क पड़ता है न सत्ताधीशों को, वरना जिम्मेदार विभागों के अफसरों की क्या मजाल कि वे खुलेआम हो रहे अवैध कार्यों पर कार्रवाई न करें. अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेत की आंच कितनी दूर तक पहुंच रही है और उसमें क्या-क्या पक रहा है. इस बार तो रेत और भी अधिक गर्म है.

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नियम बहुत हैं, सवाल नीयत का है

बिरकोनी में लाखों टन रेत के अवैध भंडारण पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. खनिज अधिकारी एचडी भारद्वाज का कहना है कि खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है, यह टीम जांच रिपोर्ट देगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया है कि बिरकोनी में अवैध भंडारण करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई अनुज्ञा नहीं दी गई है. अब सवाल है कि विभाग क्या कार्रवाई करेगा. आम तौर पर विभाग अवैध भंडारण पर प्रति घनमीटर के हिसाब से पेनाल्टी वसूल करता है और अनुज्ञा जारी कर दी जाती है.

जानकारों का कहना है कि यदि ऐसा ही होना है फिर तो कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होगी. अवैध रेत भंडारण व कालाबाजारी करने वालों पर तो एफआईआर होनी चाहिए. सारी रेत जब्त कर नीलाम किया जाना चाहिए. बरबसपुर और बड़गांव रेत घाट से इतने बड़े पैमाने पर निकाली गई रेत का पीटपास जांच होनी चाहिए. यदि बिना पीटपास के रेत निकल रही है तो इन रेत घाटों की अनुमति रदद् की जानी चाहिए. नियम तो यह भी है कि जिस पंचायत में खनिज संसाधन का अवैध उत्खनन, भंडारण हो रहा है वहां के सरपंच-सचिव को पद से हटाने की कार्रवाई की जाएगी.

नियम के तहत संबंधित पंचायतों के सरपंच-सचिव को पद से हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही. गौरतलब है कि कुछ समय पहले महासमुंद अनुविभाग के 8-10 सरपंचों को रेत के अवैध खनन को लेकर पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत नोटिस जारी की गई थी कि क्यों न उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई की जाए. बाद में सब कुछ ठंडा पड़ गया. जब नियम कानून का पालन नहीं होगा तो अराजकता की स्थिति तो बनेगी ही. नियम बहुत हैं, सवाल नीयत का है.

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