नई दिल्ली. पूरे देश में आज महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. महाशिवरात्रि पर्व रात्रि व्यापिनी होने पर विशेष फल मिलता हैं. इस बार महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र का साक्षी सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग एवं त्रयोदशी प्रदोष का योग बना है, जो शिवभक्तों के लिए बेहद फलदायी होगा. यह संयोग अत्यंत दुर्लभ है. इस संयोग में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का पाठ करें. शिव विशेष वरदान देते हैं. शिवरात्रि पर 4 प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है. शिवरात्रि पर 4 प्रहर की पूजा से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती हैं.
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महाशिवरात्रि का महत्व
हिंदू पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पर एक लोटा जल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस दिन व्रत, साधना, मंत्रजाप तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है.
महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 21 फरवरी 2020 को शाम 5 बजकर 20 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त : 22 फरवरी 2020 को शाम 7 बजकर 2 मिनट तक
रात्रि प्रहर की पूजा का समय : 21 फरवरी 2020 को शाम 6 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक
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महाशिवरात्रि की पूजा विधि
शिव रात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान कराएं. केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं. पूरी रात्रि दीपक जलाएं. चंदन का तिलक लगाएं. तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगाएं. पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें.










