आज देश भर में दीपावली का शुभ त्योहार मनाया जा रहा है. हर साल कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दिवाली का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विधान हैं. मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि तथा बुद्धि का आगमन होता है.
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पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के तीन मुहूर्त होते हैं. इन्हें प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल कहा जाता है. लक्ष्मी पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 9 मिनट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनट तक है. प्रदोष काल 5 बजकर 34 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट तक व वृषभ काल 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 6 मिनट तक शुभ मुहूर्त है.
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पूजन सामग्री
कमल पर बैठी मां लक्ष्मी, भगवान गणेश की मूर्ति, कमल और गुलाब की पत्तियां, साबुत पान के पत्ते, रोली, सिंदूर और केसर, साबुत चावल, सुपारी, फल, मिठाई, दूध, दही, शहद, इत्र और गंगाजल, कलावा, खील-बताशे, पीतल का दीपक और मिट्टी की दिए, तेल, घी और रूई की बाती, कलश, एक नारियल, चांदी का सिक्का, लाल या पीले रंग का आसन और चौकी.
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चढ़ाएं ये 5 प्रसाद
मान्यता है कि मां लक्ष्मी को नारियल बहुत पसंद है. अगर दिवाली पर आप मां लक्ष्मी के पूजन में नारियल को प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं तो देवी लक्ष्मी आप पर प्रसन्न हो सकती हैं. मां लक्ष्मी को बताशे बहुत पसंद हैं. बताशे का भोग लगाने पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. मां लक्ष्मी को पानी में उगने वाला सिंघाड़ा भी बहुत प्रिय है. अगर आप इस दिवाली मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें सिंघाड़ा प्रसाद के रूप में जरूर चढ़ाएं. मां लक्ष्मी को खास तौर पर मीठा पान चढ़ाया जाता है. मां लक्ष्मी का पूजा संपन्न होने के बाद पान का भोग लगाना चाहिए. देवी लक्ष्मी को प्रसाद में मखाने का भोग लगाना भी बहुत फलदायक होता है. मखाना देवी लक्ष्मी के प्रिय फूल कमल का फल होता है इसलिए देवी लक्ष्मी को यह बहुत पसंद है.
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