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करंट से जंगली सुअर का शिकार, 2 गिरफ्तार, एक फरार

Published on: December 3, 2021
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पिथौरा. सोनाखान वन परिक्षेत्र में गुरुवार को जंगली सुअर के शिकार के दो आरोपियों को वनकर्मियों ने पकड़ा है. वहीं शिकार में शामिल एक अन्य आरोपी फरार होने में सफल हो गया. बहरहाल, वन विभाग ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी की तलाश में जुट गया है. जानकारी के अनुसार असनीद बीट के कक्ष क्रमांक 212 के समीप खेत में जंगली सुअर के शिकार के लिए शिकारियों ने जीआई तार फैलाकर रखा था. इस करंटयुक्त तार में फंसकर एक जंगली सुअर मारा गया था. बाद वन विभाग को घटना की सूचना मिलते ही पतासाजी कर 2 आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. वहीं एक आरोपी फरार बताया जा रहा है.

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असनीद निवासी जयसिंग ध्रुव, भोजराम उर्फ बबलू ध्रुव ने विभागीय पूछताछ में शिकार की बात कबूल करते हुए बताया कि 1 दिसंबर को रात 8 बजे तीनों ने जीआईतार, फरसा, टार्च लेकर शिकार करने असनीद बीट के कक्ष क्रमांक 212 के समीप खेत की तरफ जाकर जीआईतार से खेत में करंट लगाए थे. बाद घर चले गए फिर 10 बजे रात को घटनास्थल गए तब तक जंगली सुअर की करंट से मौत हो गई थी. फिर जंगली सुअर को घर ले गए जहां पर उसे काटकर गोश्त बनाया गया. जो कि 30 किलो के आसपास था. पश्चात तीनों मांस को आपस में बंटवारा कर लिए. अपने अपने घर में पकाकर खा लिए. एसडी ओ विनोद ठाकुर व गोविंद सिंह वन परिक्षेत्र अधिकारी सोनाखान के निर्देशन में वन विभाग को मुखबिर से जानकारी मिलने पर आरोपी बबलू के घर दबिश दी गई. उसके यहां कच्चा मांस जब्त किया गया. तीनों आरोपी के खिलाफ वन प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 एवं वन्य जीव संरक्षण संशोधन अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई की जा रही है.

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उक्त प्रकरण में आरके दुबे परिक्षेत्र सहायक देवतराई, अश्वनी रात्रे परिषर रक्षी असनीद, राकेश कुमार चंद्रा, अश्वनी कुमार साहू, रमाकांत पटेल, प्रभुराम कंवर, राजकुमार, परमेश्वर, संजय, हीरा सिंग, सुरेश का प्रमुख रूप से योगदान रहा. ज्ञात हो कि अभ्यारण्य के आसपास के परिक्षेत्रों में वन्य प्राणी के बेतहासा शिकार हो रहे हैं पर पड़ोस के देवपुर वन परिक्षेत्र में एक पूर्णकालिक रेंजर के पदस्थ रहते तक सप्ताह में एक दो शिकार के प्रकरण पकड़े जाते थे पर इस परिक्षेत्र में एक उच्च स्तर तक पहुंच रखने वाले डिप्टी रेंजर को प्रभार मिलने के बाद से शिकार के प्रकरण बनने ही बन्द हो गए. यहां पदस्थ प्रभारी रेंजर के बारे में बताया जाता है कि वे पूर्व में शिकार करने के मामले में जेल की हवा भी खा चुके हैं. बाद में न्यायलयीन प्रक्रिया के तहत बरी होने के बाद उन्हें पुनः बहाल किया गया था.

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