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50 करोड़ की रेत… इतनी गर्म रेत पर अफसर कैसे हाथ डालें? इसलिए अवैध को वैध करने का खेल!

Published on: June 7, 2021
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महासमुंद. एक हाइवा में करीब 15 टन रेत आती है, जिसकी मौजूदा रेट करीब 10 हजार रुपए है. सूत्रों के अनुसार अकेले बिरकोनी में करीब 50 हजार हाइवा यानी करीब 7 लाख 50 हजार टन रेत डम्प है, जो मौजूदा रेट के हिसाब से करीब 50 करोड़ रुपए की है. कितने की? 50 करोड़ की! अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेत कितनी गर्म है. इतनी गर्म रेत पर हाथ डालने की हिम्मत अफसर कैसे कर पाएंगे? रेत तो घोड़ारी, बरबसपुर, परसवानी, सांकरा में भी डम्प है, एक जगह हाथ डालें तो बाकी जगह भी डालना पड़ेगा और हर जगह कोई न कोई सत्ताधीश रेत चोरों का आका बना बैठा है. साधारण आदमी भी यही कहता है कि अगर सत्ताधीशों का संरक्षण नहीं होता तो जगह-जगह रेत के अवैध पहाड़ खड़े नहीं होते लेकिन ख़बरनवीस हल्ला मचा रहे हैं.

रेत के अवैध खनन, अवैध परिवहन, अवैध भंडारण की तस्वीरें दिखा रहे हैं. ऐसे हालात में कार्रवाई के नाम पर अवैध को वैध करने का खेल चल रहा है. जो लोग बिना अनुमति या अनुज्ञा के पिछले कई महीनों से रेत का अवैध भंडारण कर रेत के पहाड़ खड़े कर रहे हैं, उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बेक डेट पर रेत भंडारण की अनुमति देकर सम्मानित किया जा रहा है.10-10 साल के लिए उस स्थान पर रेत भंडारण की अनुमति प्रदान की जा रही है. तो क्या जिला प्रशासन रेत माफियाओं पर मेहरबान नहीं है? खनिज विभाग की रेत माफियाओं पर दरियादिली को इस बात से समझा जा सकता है कि, 8 मार्च 2021 तक की स्थिति में रेत भंडारण के लिए जिले में कुल 5 लोगों को अस्थायी अनुज्ञा दी गई थी. इनमें 24/04/2020 से 23/04/2030 के लिए 3 लोगों बरबसपुर के अमित चंद्राकर के नाम खसरा नंबर 224/2 0.40 हेक्टेयर भूमि पर 4 टन, सतन परमार को खसरा नंबर 1020/2 0.24 हेक्टेयर के लिए 4 हजार टन, भुवनेश्वरी निषाद के खसरा नंबर 222, 223, 1, 2, 3, 4, 0.58 हेक्टेयर पर 2 हजार टन,

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लहंगर के बलराम कांत साहू को 11/01/2021 से 10/01/2031 तक के लिए खसरा नंबर 240 0.57 हेक्टेयर पर 10 हजार टन तथा घोडारी के अखिलकांत साहू को खसरा नंबर 563, 564, 565/1, 0.25 हेक्टेयर पर 250 टन रेत भंडारण की अनुज्ञा जारी की गई थी. जैसे ही मीडिया में बिरकोनी में हो रहे अवैध रेत भंडारण सुर्खियों में आया तो आनन-फानन में खनिज विभाग ने बेक डेट यानी 8 मार्च 2021 को 7 लोगों को अनुज्ञा जारी कर दी. खनिज अधिकारी एचडी भारद्वाज ने 8 मार्च को मीडिया को दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए अपने रिकार्डडेड बयान में कहा था कि, आज की स्थिति में यानी 8 मार्च तक बिरकोनी में कोई भी अनुमति नहीं दी गई है. 13 मार्च को जब सीएम सिरपुर आए थे और उनसे अवैध भंडारण पर सवाल किया गया था, उसके कुछ दिनों बाद भी खनिज अधिकारी अपने वर्जन में यही कहते रहे कि बिरकोनी में किसी को भी रेत भंडारण की अनुमति नहीं दी गई है, टीम भेजकर जांच कराई जाएगी. लेकिन इसके बाद बेक डेट में खसरा नंबर 2370 की भूमि पर 0.42 हेक्टेयर जो कि, गजानंद पिता तखत प्रसाद के नाम पर दर्ज है.
इस भूमि पर दामोदर चंद्राकर को 08/03/2021 से 07/03/2031 तक के लिए 4 हजार टन भंडारण की अनुज्ञा दी गई.ऐसे ही रघुलाल के नाम खसरा नंबर 2368-0.49 हेक्टेयर भूमि पर प्रकाश चंद्राकर के नाम 4 हजार टन भंडारण की अनुज्ञा दी गई. खसरा नंबर 1996 जो कि, गिरधारी पिता टिभूराम के नाम पर दर्ज है, इस भूमि पर संदीप निषाद को 0.80 हेक्टेयर पर 4 हजार टन, खसरा नंबर 2388 का भूमि स्वामी शत्रुघन है उस भूमि पर दीपक चंद्राकर को 0.43 हेक्टेयर पर 2 हजार टन, लखन परानू की खसरा नंबर 2430 के 0.35 हेक्टेयर भूमि पर सौरभ चंद्राकर के नाम 2 हजार टन का अनुज्ञा जारी कर दी गई. इसी तरह बरबसपुर के अजय कुमार, चंद्रहास, नवीन कुमार, राम बाई, सरिता तथा हेमंत कुमार के नाम दर्ज भूमि खसरा नंबर 963, 973  0.78 हेक्टेयर पर ईशान मिनरल्स को 5 हजार टन, पिथौरा के ग्राम परसवानी के ईश्वरलाल, भरत कुमार के नाम दर्ज खसरा नंबर 365 जो एचडीएफसी बैंक में बंधक है, इस भूमि के खसरा पर मनीष कुमार 0.78 हेक्टेयर पर 1000 टन,

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बिरकोनी के घुरऊ के नाम की जमीन 0.44 हेक्टेयर पर चंदन चंद्राकर को 2 हजार टन, सांकरा के पुरषोत्तम के नाम खसरा नंबर 341, 342 की भूमि पर श्रीमती दिव्या उप्पल को 0.90 हेक्टेयर में 5 हजार टन, खड़सा के नरेन्द्र कुमार की खसरा नंबर 291/1 के 0.38 हेक्टेयर पर अमित कुमार दुबे को 2 हजार टन, घोड़ारी खसरा नंबर 464 जो दीपक कुमार के नाम से है उसे गोल्डन मिनरल्स 1.22 हेक्टेयर पर 17 हजार टन रेत भंडारण अनुज्ञा दी गई है. बिरकोनी के खसरा नंबर 2411 जो मेहत्तर, मेहत्तरीन, दुलारी पिता पुनाउराम के नाम की जमीन पर योगेश को 6750 टन तथा खसरा नंबर 2410 सेवकराम, किसन, फगुआ की भूमि पर दिलीप चंद्राकर को 0.80 हेक्टेयर में 6 हजार टन भंडारण की अनुमति मिली है. अधिकांश स्थानों पर खनिज विभाग ने जितनी मात्रा में भंडारण की अनुमति दी है उससे कई गुना अधिक रेत डंप है.
वहीं औद्योगिक प्लाटों, फैक्ट्रियों के अंदर बाहर और पौधरोपण की भूमि पर रेत डम्प होने के बावजूद विभाग भंडारण की अनुज्ञा नहीं दे पा रहा है. औद्योगिक क्षेत्र के अंदर जिस जगह विद्युत सब स्टेशन बनना है, वहां 10 साल के लिए रेत भंडारण की अनुमति दी जाएगी तो विद्युत सब स्टेशन कहां स्थापित होगा. जिन लोगों ने फैक्ट्रियों के अंदर प्रशासन का ताला तोड़कर रेत अवैध रूप से डम्प की है, उसके खिलाफ भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा. जो लोग रेत के अवैध पहाड़ खड़े कर हरे-भरे पेड़ पौधों की हत्या कर रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही. पचास करोड़ की रेत की इतनी तपन इतनी तेज है कि, प्रशासन के अफसर हाथ डालने से थर्रा रहे हैं. जिला प्रशासन ने इस बात को सच साबित कर दिया है कि, सारे के सारे नियम कानून गरीब बेबस कमजोरों वर्गों पर आजमाने के लिए होते हैं. अब लोगों को भी लगने लगा है कि, सत्ता के मठाधीशों के आगे वह भी नतमस्तक है.

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