नई दिल्ली. निर्भया के दोषी फांसी से बचने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं. अब दोषी मुकेश ने राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका ठुकराए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. यह बात मुकेश की वकील वृंदा ग्रोवर ने बताई है. गौरतलब है कि मौत की सजा पाए दोषी के लिए बचने का यह अंतिम रास्ता होता है. जब राष्ट्रपति किसी की दया याचिका खारिज कर दे तो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. यह चुनौती दोषी को दया याचिका खारिज होने के 14 दिन के अंदर करनी होती है. अगर यह याचिका भी खारिज हो जाती है तो फिर मुकेश के पास सभी कानूनी विकल्प पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे और नियत तारीख को उसे फांसी हो सकती है.
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यह फांसी उसी हालत में रुकेगी जब अन्य तीन दोषियों का कोई केस लंबित हो और फांसी की तारीख तक उस पर फैसला न आ सके. तब फांसी की एक नई तारीख घोषित की जा सकती है. वहीं, शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने दोषी पवन, विनय और अक्षय के वकील की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि तिहाड़ जेल दस्तावेज नहीं सौंप रहा है. अभियोजन पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने दोषियों के वकील द्वारा मांगे गए सभी संबंधित दस्तावेज उन्हें पहले ही मुहैया करा दिए हैं. इस पर अदालत ने कहा कि इस मामले में आगे किसी दिशा-निर्देश की आवश्यकता नहीं है और कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी.
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