बागबाहरा. जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने कहा है कि भूपेश सरकार वास्तव में किसान हितैषी है तो धान खरीदी पर नियम कानून शिथिल करें. कांग्रेस सरकार अपने चुनावी घोषणा अनुरूप किसानों की धान खरीदी नहीं कर रही है. वे खरीदे गए धान का भुगतान एकमुश्त क्यों नहीं कर रही है. प्रदेश सरकार के धान खरीदी व भुगतान को लेकर किसान में नाराजगी है. धान खरीदी में भी अनेक नए कानून बनाकर किसानों को छला जा रहा है. अध्यक्ष स्मिता ने कहा कि धान खरीदी विलंब से शुरु कर किसानों को खलिहान में दो महीने रतजगा के लिए विवश किया जा रहा है. किसानों की धान एकमुश्त खरीदी करने के बजाए किश्तों में खरीदी क्यों की जाती है. उन्होने कहा कि किसानों को उनके भूस्वामी हक के कुल रकबा में कर्ज दिया जाता है पर छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों
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के धनहा जमीन में से प्रति एकड़ मेड़ पार के एवज में 15 डिसमिल जमीन का रकबा कम कर धान खरीदी का फरमान जारी किया है, यह किसान विरोधी नीति ही नहीं, काला कानून है. छत्तीसगढ़ सरकार अपने चुनावी वादों के अनुरूप किसानों का धान बिना शर्त के खरीदी कर एकमुश्त भुगतान करें ताकि किसानों का भला हो सके. किसानों का लगभग 90 प्रतिशत धान अक्टूबर तक कट कर खलिहान में पहुंच जाता है. उन्होने कहा कि सरकार की धान खरीदी एक दिसम्बर से प्रारंभ करने का आदेश व्यवहारिक रुप से सही नहीं है चूंकि नवंबर माह में दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार है. त्यौहारी सीजन में घरों की साफ-सफाई, नई सामग्रियों की खरीददारी करनी होती है यही नहीं, किसान को मजदूरी एवं हार्वेस्टर का भुगतान करना पड़ता है. ऐसे समय में धान की खरीदी नहीं करने से यहां के किसानों को औने-पौने दाम पर अपनी उपज को कोचियों के पास बेचना पड़ता है और वही धान खरीदी केन्द्र तक पहुंचता है जिससे किसानों के साथ सरकार को भी भारी आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है. यही नहीं साधन सम्पन्न किसानों को रबी फसल की तैयारी भी करनी पड़ती है इसलिए सरकार धान खरीदी एक नवंबर से शुरु कर किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाएं और धान का एकमुश्त भुगतान करें तथा किसानों के प्रति एकड़ 15 क्विंटल निर्धारित मात्रा के अनुपात में एकमुश्त खरीदी की जाए तथा जमीन रकबा कम करने के फरमान को हर हाल में वापस लें.
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उन्होने कहा जब केन्द्र ने छत्तीसगढ़ सरकार को धान खरीदी करने नौ हजार करोड़ रुपए जारी किए हैं तो सरकार धान की खरीदी विलंब से क्यों कर रही है. यहां के किसान न्यूनतम 20 और अधिकतम 30 क्विंटल तक धान का उत्पादन कर रहे हैं पर सरकार मात्र 14.80 क्विंटल ही धान खरीदी करती है शेष धान को किसान बिचौलियों के पास 13 सौ रुपए में ही बेच पाते हैं. ऐसे में किसानों को बेहद नुकसान सहना पड़ता है. छत्तीसगढ़ यदि वास्तव में किसानों की हित में है तो किसानों के धनहा रकबा कम कर और 20 किलो कम धान खरीदी कर रहे हैं उसमें सुधारकर किसानों का भला करें. छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में फैसला लें और हर हाल में एक नवंबर से धान की खरीदी बिना लाग लपेट प्रारंभ करें.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) October 2, 2020







