नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक परिवार ने अनूठी मिसाल कायम की है. यहां पर एक परिवार की महिलाओं ने घर की बुजुर्ग महिला सदस्य की अर्थी को न सिर्फ कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि भी दी. चिरईगांव इलाके में वर्ष 2018 में संतोरा देवी की मौत होने पर बेटियों को बेटे की बराबरी का दर्ज दिलाने के लिए अंतिम संस्कार में बहू-बेटियों की भागीदारी निभाने की परंपरा शुरू हुई थी. इसी क्रम में बरियासनपुर गांव के हरिचरण पटेल की पत्नी रज्जी देवी का बुधवार को निधन होने पर बहू-बेटियों ने प्राचीन मिथकों को तोड़ने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया. इसे ग्राम प्रधान और गांव के पुरुषों का समर्थन मिला.
http://VIDEO : आयुष्मान की ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ का प्रोमो रिलीज
यहां बुधवार को 80 साल की रज्जी देवी का निधन होने पर बहू-बेटियों और परिवार की महिलाओं ने अर्थी को कंधा दिया तो बड़ी बेटी हीरामनी ने मुखाग्नि दी. इसके साथ ही उन्होने फिजूलखर्ची रोकने के लिए तेरहवीं के भोज का कार्यक्रम नहीं करने का ऐलान किया है. इस घटनाक्रम की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है. रज्जी देवी के एकमात्र पुत्र भागीरथ प्रसाद ने बताया कि तेरहवीं पर भोज का कार्यक्रम नहीं होगा यह एक फिजूलखर्ची है. उस दिन पूरा परिवार शोकसभा कर उनकी याद में पौधरोपण करेगा.
http://एसबीआई में निकली 700 पदों पर भर्तियां, जल्द करें आवेदन









