महासमुंद/पिथौरा. क्षेत्र में विचरण कर रहे हाथियों के एक झुंड ने शुक्रवार की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले दो किशोरों पर हमले का प्रयास किया जिससे दोनों किशोर घायल हो गए. बताया जाता है कि हाथी एक को उठाकर फेंका और दूसरे को पटकना चाहा पर दोनों किशोर तत्काल वहां से भाग निकले जिसके कारण उनकी जान बच गई. बहरहाल, महासमुंद के जिला स्वास्थ्य केंद्र में एक घायल किशोर का उपचार जारी है. जबकि दूसरे का उपचार महासमुंद के एक निजी अस्पताल में जारी है. इधर, वन विभाग के एसडीओ एसएस नाविक ने बताया कि घायलों का उपचार करवाया जा रहा है. परिजनों को एक-एक हजार रुपए तात्कालिक सहायता दे दी गई है.
जानकारी के अनुसार बरोण्डा-साराडीह मार्ग पर आज शुक्रवार की प्रातः ग्राम के ही दो किशोर सोमेश कुर्रे (14) एवं डेविड गायकवाड़ (18) मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. दोनों ही किशोर ग्राम साराडीह निवासी बताए जा रहे हैं. प्रातः करीब 5 बजे अंधेरा होने के कारण वे हाथियों के झुंड को देख नहीं पाए और उनके करीब पहुंच गए थे. वॉक पर कुछ और भी बच्चे निकले थे. हाथियों को देखकर सभी बच्चे चीख पुकार मचाते हुए घटनास्थल से भाग निकले. जबकि दोनों घायल हाथियों के चंगुल में फंस गए थे. हाथियों के पटकते ही दोनों किशोर वहां से चीखते हुए वापस ग्राम की ओर भाग निकले. बच्चों की चीख सुनकर ग्रामीण भी घटनास्थल की ओर भागे पर तब तक हाथियों का झुंड बेलसोंडा होते बिरकोनी की ओर बढ़ गया था.
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इधर, सुखीपाली पहुंचे हाथी
जिला मुख्यालय के नजदीक पहुँचे हाथियों के एक बड़े झुंड के अलावा हाथियों का एक झुंड पिथौरा के समीप सुखीपाली जंगल पहुंच गया है. विभागीय सूत्रों के अनुसार ओड़िशा से चार सदस्यीय हाथियों का दल बुधवार रात पिथौरा वन परिक्षेत्र में पहुंच गया है. हाथियों की आमद की खबर मिलने के बाद वन विभाग ने आसपास के करीब दर्जनभर गांवों में मुनादी करा दी है. हालांकि हाथी को अभी तक किसी ने नहीं देखा है. जानकारी के मुताबिक हाथियों के दल का कक्ष क्रमांक 226-227 में होने की खबर है.
वन परिक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि ओडि़शा से पहुंचा यह दल बुधवार देर रात यहां कंपार्टमेंट 290 से गिरना और टिकरापारा ओडि़शा होते हुए पिथौरा पहुंचा है. हाथियों की आने की खबर उन्हें लोरम के ग्रामीणों से मिली. जिसके बाद क्षेत्र में हाथियों पर नजर रखने पेट्रालिंग शुरू कर दी गई है और लोरम, फटामुड़ा, गिरना, टिकरापारा और छिंदौली सहित दर्जनभर गांवों में मुनादी करा दी गई है. बताया जाता है कि ओड़िशा से पहुंचा यह दल साल में एक बार जरुर पिथौरा वन परिक्षेत्र में पहुंचता है.
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