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मुख्यमंत्री भूपेश की छवि धूमिल करने पर आमादा हैं जिला प्रशासन?

Published on: December 13, 2019
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महासमुंद. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि समितियां किसानों की धान खरीदी अपनी क्षमता अनुरूप करें पर बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने समितियों की खरीदी लिमिट तय कर दी है. कलेक्टर ने गुरूवार को जनपद पंचायत बागबाहरा के सभागार में धान खरीदी प्रभारी नोडल अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, खाद्य निरीक्षक सहित सहकारिता विभाग के कर्मचारियों की बैठक लेकर निर्देशित किया है कि हमने जो खरीदी की सीमा तय की है उसके अंतर्गत ही किसानों का धान खरीदें. बताते हैं कि कलेक्टर ने कहा है कि लघु एवं सीमांत किसानों का धान पहले खरीदी करें और बड़े किसानों का धान बाद में. कलेक्टर के इस निर्देश से सभी खरीदी केन्द्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है. ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एनआईसी ने आज ही अपना साफ्टवेयर बदला है. उसमें व्यवस्था है कि समिति जितना खरीदी कर सकें उतना टोकन जारी कर सकता है.

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इस बात की जानकारी मिलने पर किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई लेकिन किसानों की खुशी उस वक्त मायूसी में बदल गई जब सहकारी विभाग के अधिकारियों ने खरीदी प्रभारी को निर्देशित किया है कि कलेक्टर ने धान खरीदी की जो लिमिट तय की है उससे अधिक धान खरीदने पर कम्प्यूटर ऑपरेटर, खरीदी प्रभारी तथा समिति के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करें. इस निर्देश से सभी समिति के कर्मचारी सकते में आ गए और कलेक्टर द्वारा तय लिमिट में धान खरीदने टोकन जारी किया. किसान नेता पारस सांखला ने बताया कि प्रशासन के तुगलकी फरमान से किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री की छवि भी जनता के बीच में धूमिल हो रही है. मुख्यमंत्री किसानों के पक्ष में बात कर रहे हैं वहीं जिले के अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्दश के विरुद्ध कर्मचारियों को अपना आदेश पालन करने दबाव बनाए हुए हैं. सांखला ने कहा कि जिला के अधिकारी के निर्देश से यह तय है कि 15 फरवरी तक किसानों की धान खरीदी करना असंभव होगा. धान खरीदी में जिला प्रशासन का यही रवैया रहा तो क्षेत्र के किसान उग्र कदम उठाने विवश होंगे और आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. किसानों ने आज मुनगासेर समिति के व्यवस्थापक का घेराव कर दिया. आक्रोशित किसानों ने बताया कि गत वर्ष बारदाना की कमी होने के कारण प्रशासन के आदेश पर समिति प्रबंधक ने 200 किसानों के 24685 बारदाने में धान खरीदी की थी. प्रति बारदाना किसानों को 12 रुपए की दर से भुगतान करना था पर आज तक भुगतान नहीं किया गया है.

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