आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्र ग्रंथ में वर्णित नीतियां भले ही आपको थोड़ी कठोर लगें लेकिन जीवन की सच्चाई कठोरता ही है. चाणक्य के विचार आज भी लोगों को सही रास्ता और जीवन में सफलता दिलाने में मदद करते हैं. एक श्लोक में चाणक्य ने बताया है कि आखिर तीन चीजों के कारण कोई भी रिश्ता टूटता है. चाणक्य कहते हैं कि जब दिल में वहम, दिमाग में जिद और बातों में मुकाबला आ जाए तो समझ लेना चाहिए कि रिश्तों की हार तय है. चाणक्य कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति के जीवन में ये तीन चीजें आ जाएं, तो उसे समझ लेना चाहिए कि रिश्ते की हार तय है.
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अगर किसी व्यक्ति के जीवन में ये बातें आती हैं तो उसके करीबियों पर भी फर्क पड़ता है. कहा जाता है कि वहम का कोई इलाज नहीं है. अगर किसी के मन में वहम आ गया है तो उसे समझाना बेकार है. वह व्यक्ति वहीं बात समझने की कोशिश करेगा जो वह समझना चाहता है. अगर जिद की बात करें तो जिस व्यक्ति ने पहले ही तय कर लिया हो उसे क्या करना है और क्या नहीं, उसे समझाना व्यर्थ होता है. वहीं बातों में मुकाबला का अर्थ है कि अगर सामने वाला कोई व्यक्ति आपसे कुछ कह रहा है और आप उसे उस पर भारी पड़ने वाले जवाब देने की कोशिश करेंगे. चाणक्य कहते हैं कि कभी रिश्ते में वहम, जिद और मुकाबले को नहीं लाना चाहिए.
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