बागबाहरा. सेवानिवृत्ति के बावजूद एक शासकीय अनुदान प्राप्त शाला में पदस्थ रहे प्राचार्य द्वारा जन्म तारीख में कूटरचना कर अपनी सेवा अवधि में दो साल की गलत ढंग से वृद्धि करा लाभ लेने का एक मामला सामने आया है. इस मामले में जिलाधीश व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पुख्ता जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना न केवल संदेह के दायरे बढ़ा रहा है, अपितु इससे सरकारी खजाने को लाखों रुपए का चूना भी लगा है. यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की खुली अवहेलना भी मानी जा रही है, जिसमें नौकरी के अंतिम पड़ाव में जन्म तारीख नहीं बदले जाने की बात कही गई है.
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इस बारे में पता चला है कि तुमगांव स्थित बागबाहरा शिक्षा समिति द्वारा संचालित पब्लिक उच्चतर माध्यमिक शाला के प्राचार्य पद पर कार्यरत रहते हुए तोषराम चंद्राकर ने रिटायरमेंट से पूर्व मिसल के आधार पर कलेक्टर से तारीख निकालकर प्राइमरी स्कूल के दाखिल-खारिज रजिस्टर में अपनी जन्म तारीख बदलवाकर सेवावृद्धि का गलत लाभ उठाया है. दाखिल-खारिज रजिस्टर में चंद्राकर की जन्म तारीख 17 मार्च, 1959 दर्ज थी, जिसे बदलकर 12 दिसम्बर, 1960 किया गया है. इसके चलते बागबाहरा शिक्षा समिति ने सेवानिवृत्ति के स्थान पर चंद्राकर को फिर दो साल की सेवावृद्धि का लाभ दिया, जबकि शासन का ऐसा कोई नियम नहीं है.
चंद्राकर की सेवा-पुस्तिका और वेतन पंजी इस पूरे प्रकरण की तस्दीक करने के लिए पर्याप्त हैं. चंद्राकर फिलहाल तुमगांव शाला से सेवानिवृत्त हैं. इस संबंध में जब इसी समिति की शाला के एक शिक्षक अविनेश कोसे ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन कर जानकारी मांगी तो उन्हें चंद्राकर की 11वीं और 5वीं की अंकसूची में जन्म तारीख में परिवर्तन किए जाने की जानकारी देने के बजाय संशोधित जन्म तारीख के साथ 5वीं की डुप्लीकेट मार्कशीट थमा दी गई. चंद्राकर ने पांचवीं की अंकसूची में परिवर्तित जन्म तारीख के आधार पर दो साल की सेवावृद्धि का गलत ढंग से लाभ लिया.
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