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कोरोना की रोकथाम में प्रदेश सरकार की विफलताओं के विरुद्ध भाजपा कार्यकर्ता कल अपने घरों के सामने देंगे धरना

Published on: April 23, 2021
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महासमुंद. भारतीय जनता पार्टी की महासमुंद ज़िलाध्यक्ष व पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी ने कहा है कि कोरोना संक्रमण से जूझते प्रदेश को राहत पहुँचाने में प्रदेश सरकार की विफलता को लेकर कल 24 अप्रैल को भाजपा द्वारा प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन की कड़ी में ज़िले में भी धरना देकर प्रदेश सरकार की विफलताओं को लेकर जनमत को जागृत किया जाएगा. धरना-प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ भाजपा कार्यकर्ता कोरोना प्रोटोकॉल का सख़्ती से पालन करते हुए अपने-अपने घरों के सामने धरना देकर प्रदेश सरकार की मुख़ालफ़त करेंगे. श्रीमती चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना संक्रमण को रोकने में पूरी तरह नाकारा साबित हो रही है.

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कोरोना जाँच, उपचार और कोरोना के इलाज की ज़रूरी दवाओं की कमी व कालाबाज़ारी ने प्रदेश सरकार की कोरोना संक्रमण के विरुद्ध लड़ाई में लापरवाही ने प्रदेश के साथ-साथ महासमुंद ज़िले को संक्रमण की अंधी गली में धकेल दिया है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के मद्देनज़र सालभर में एक भी ज़रूरी क़दम नहीं उठाए और उसका नतीजा ही है कि अब महासमुंद ज़िला भी कोरोना विस्फोट के मुहाने पर खड़ा नज़र आ रहा है. श्रीमती चौधरी ने कोरोना उपचार केंद्रों की लचर व्यवस्था को लेकर भी ज़िला प्रशासन और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए ज़िला अस्पताल के जीएनएम कोविड सेंटर से एक मरीज के अचानक चले जाने और बाद में उसके मृत होने को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्टाफ की अनभिज्ञता पर सवाल उठाया है.

उन्होने कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि उक्त कोविड सेंटर में भर्ती सरायपाली ब्लॉक के ग्राम कोदोगुड़ा निवासी चमरू सिदार नामक वृद्ध के परिजनों को वहां का स्टाफ स्वस्थ बताता रहा जबकि उक्त मरीज की मौत 12 अप्रैल को ही हो चुकी थी और पुलिस लावारिस शव का मामला मानकर उसका अंतिम संस्कार भी कर चुकी थी. श्रीमती चौधरी ने बताया कि 10 अप्रैल को भर्ती चमरू के बारे में उसकी पुत्री व पुत्र शिवचरण को रोज फोन पर स्वस्थ होने की जानकारी दी जाती रही और एकाएक 21 अप्रैल को चमरू के परिजनों को उसके लापता होने की सूचना दी गई और फिर अगले दिन चमरू के परिजनों को महासमुंद सिटी कोतवाली बुलाकर 12 अप्रैल को मिले शव की तस्वीर दिखाकर शिनाख्ती कराई, जिसे लावारिस समझ 15 अप्रैल को मुक्तिधाम सेवा समिति ने अंतिम संस्कार किया था.

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उन्होने सवाल किया कि जब चमरू कोविड सेंटर में था ही नहीं तो स्टाफ ने इसकी सूचना तत्काल परिजनों को क्यों नहीं दी? वे किसके स्वस्थ होने का झूठ परिजनों को परोस रहे थे? श्रीमती चौधरी ने इसे कोविड अस्पताल की शर्मनाक अव्यवस्था और अमानवीयता का मामला बताते हुए इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच और दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. इस मामले ने प्रदेश सरकार के उन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है, जो कोरोना की रोकथाम को लेकर बड़ी-बड़ी डींगें हाँककर प्रदेश सरकार, उसके नुमाइंदे और प्रशासन चला रहे नौकरशाह करते नहीं थकते। भाजपा का कल 24 अप्रैल का धरना-प्रदर्शन प्रदेश सरकार की इन तमाम विफलताओं को जनता के समक्ष लाने का एक प्रभावी राजनीतिक अभियान सिद्ध होगा.

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