खरसिया. गरीब छात्र-छात्राओं के मध्याह्न भोजन हेतु वितरित की जाने वाली सोया बड़ी में कीड़े होने की शिकायत पर आनन-फानन में खरसिया शिक्षा विभाग के द्वारा वितरण तो रोक दिया गया है, पर इस भीषण संक्रमणकाल में इस तरह की लापरवाही बीज निगम सहित अन्य जवाबदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर बड़ा प्रश्न खड़ा कर रही है. वहीं यह प्रश्न भी है कि इन सड़ी हुई बड़ी के बदले क्या इन गरीब विद्यार्थियों को सही खाद्यान्न पुनः मिल पाएगा या कि नहीं? वर्तमान में विद्यालय तो बंद हैं, पर मध्याह्न भोजन हेतु छात्र-छात्राओं को सूखा राशन दिया जा रहा है.
खरसिया विकासखंड के विभिन्न स्कूलों हेतु 1 एवं 2 जून को 7885 किलोग्राम सोया बड़ी पौष्टिक आहार के रूप में बीज निगम रायपुर द्वारा भेजी गई थी. वहीं शिक्षा विभाग के लापरवाह अधिकारियों द्वारा कीड़ों वाली सोया बड़ी के इन पैकेटों का वितरण संकुलों से होते हुए कुछ विद्यार्थियों तक भी कर दिया गया है. बताना लाजिमी होगा कि इन पैकेटों को खोलते ही बड़ी कम और कीड़े अधिक निकलते हैं. ऐसे में मध्याह्न भोजन के नोडल अधिकारी गुलाब सिंह कंवर तथा समस्त संकुल समन्वयकों की मॉनिटरिंग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
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वापस मंगाए जा रहे पैकेट
पौष्टिक सोया बड़ी के पैकेट में कीड़े निकलने की शिकायत को लेकर विकासखंड शिक्षाधिकारी ने 7 जून को पत्र क्रमांक 247 लिखकर ग्राम तिऊर, बरगढ़, बरभौना, रॉबर्टसन, जैमूरा, सोंड़का, कुनकुनी, सोनबरसा, बसनाझर आदि केंद्रों से सोया बड़ी के पैकेट वापस बुलवाए हैं. पत्र में शिक्षाधिकारी ने बीज निगम से दूरभाष के माध्यम से मिले निर्देशों का हवाला देकर सोया बड़ी के पैकेट वापस बुलवाएं हैं, ऐसे में यह ताज्जुब है कि क्या राजधानी से अन्यान्य जिलों को मौखिक आदेश दिए गए हैं? जबकि स्वयं के अधीनस्थ कर्मचारियों को बीईओ ने लिखित आदेश दिया है.
बीईओ और नोडल अधिकारी कर रहे टालमटोल
सोया बड़ी के पैकेट में कीड़े निकलने की जानकारी पर जब खरसिया बीईओ एके भारद्वाज से रूबरू होकर बात की गई तो उन्होंने प्रश्न के बदले प्रश्न पूछना शुरू कर दिया कि यह खबर आपको कहां से मिली? वहीं मध्याह्न भोजन के नोडल अधिकारी गुलाब सिंह कंवर ने पैकेट दिखाने में पर्याप्त टालमटोल करते हुए कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सभी पैकेट 9 जून को ही वापस कर दिए गए हैं. बताना लाजमी होगा कि अपनी मॉनिटरिंग पर आंच आती देख दोनों अधिकारियों ने गुमराह करने का पूरा प्रयास किया है, जबकि वास्तविकता यह है कि अब तक कई संकुलों से कीड़े वाले पैकेट वापस ही नहीं पहुंच पाए हैं.
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मैनुफैक्चरिंग एवं एक्सपायरी डेट प्रिंट ही नहीं
इसे लापरवाही कहें या चालाकी कि सोया बड़ी के पैकेट पर लुभावनी तस्वीर के साथ पौष्टिक सोया बड़ी का बड़ा-बड़ा विज्ञापन तो छपवाया जा रहा है, परंतु अत्यावश्यक मैन्युफैक्चरिंग तथा एक्सपायरी डेट का कोई भी उल्लेख नहीं किया गया. ताज्जुब इस बात पर है कि यह सब राजधानी स्थित बीज निगम के द्वारा धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा है, बावजूद किसी प्रकार की कोई रोक-टोक नहीं हो रही. वहीं कोरोना जैसी महामारी के बीच इतनी घोर लापरवाही और उस पर भी अधिकारियों द्वारा लीपापोती करना, निर्दोष छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य के लिए कितना लाभप्रद तथा न्यायसंगत होगा, इसका अनुमान आप स्वयं लगा सकते हैं.
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