रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस ट्वीट पर तीखा हमला बोला है, जिसमें मुख्यमंत्री बघेल ने लोगों को कान खोलकर यह सुन लेने और मीडिया को मर्यादा नहीं भूलने को कहा है कि राहुल गांधी इस समय विपक्ष के प्रमुख नेता हैं और उनके बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग कांग्रेस कार्यकर्ता क़तई स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होने सवाल किया कि मुख्यमंत्री बघेल इस ट्वीट के ज़रिए क्या कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उकसाकर प्रदेश को राजनीतिक हिंसा और अराजकता के गर्त में धकेलने की मंशा रखते हैं. या फिर, रेत की तरह अपनी मुठ्ठी से फिसलती सत्ता से विचलित होकर क्या वे राहुल गांधी के प्रति अपनी स्वामिभक्ति की पराकाष्ठा कर कुर्सी बचाने का गर्हित राजनीतिक उपक्रम कर रहे हैं?
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श्री कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल के इस ट्वीट की भाषा प्रदेशवासियों के साथ ही मीडिया प्लेटफार्म्स के लिए भी धमकी भरी है जिसमें मुख्यमंत्री ने यह कहकर कि ‘लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ का दायित्व निभा रहे हर मीडिया का पूर्ण सम्मान है, लेकिन मर्यादा नहीं भूलना चाहिए’, मीडिया जगत को भी मर्यादा में रहने की खुली चेतावनी दी है. अभिव्यक्ति की आज़ादी का झंडा लेकर जब-तब प्रलाप करने वाले मुख्यमंत्री बघेल की यह भाषा अपने राजनीतिक व वैचारिक विरोधियों और मीडिया के लिए सत्तावादी अहंकार में पलती-पनपती अहिष्णुता की पराकाष्ठा है. उन्होने मुख्यमंत्री बघेल के इस ट्वीट को लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की अभिव्यक्ति के अधिकार पर खुला हमला बताया और कहा कि एक सांसद की राजनीतिक हैसियत रखने वाले अपने नेता के लिए बिफरते मुख्यमंत्री बघेल की मर्यादा तब किस वेंटीलेटर पर दम तोड़ रही थी जब मुख्यमंत्री पद पर होते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आईना भेजने की राजनीतिक धृष्टता का प्रदर्शन और अपने ‘ख़ानदानी शहज़ादे’ के झूठ को पकड़कर प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ विष-वमन कर रहे थे. श्री कौशिक ने कहा कि भाजपा किसी के भी प्रति अभद्र भाषा के प्रयोग की हिमायती क़तई नहीं है, लेकिन किसी मुख्यमंत्री की मर्यादा के पालन की इकतरफ़ा अपेक्षा में इस तरह की धमकीभरी भाषा को भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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मुख्यमंत्री के इस ट्वीट की जितनी निंदा की जाए, कम ही होगी. कांग्रेस के लोगों द्वारा प्रधानमंत्री को चोर बोलते समय, प्रधानमंत्री के विरुद्ध मनमानी अभद्र भाषा का प्रयोग करते समय, भगवान राम के अस्तित्व को नकारते और अपने राजनीतिक विरोधियों की चरित्र हत्या के लिए किसी भी स्तर तक जाते समय मुख्यमंत्री बघेल के ‘ज्ञान-चक्षु’ और कान क्यों बंद हो जाते थे और अब भी अपनी और अपने मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की भाषायी मर्यादा पर मुख्यमंत्री बघेल को कोफ़्त क्यों नहीं होती है. उन्होने कहा अपनी कुर्सी बचाने के लिए मुख्यमंत्री बघेल चाहे जिसकी और चाहे जितनी स्वामिभक्ति करें, यह उनके अबतक के सियासी वज़ूद की नियति है, लेकिन अपने से असहमत प्रदेशवासियों और मीडिया जगत को मर्यादा में रहने की धमकी देने के लिए पहले उन्हें प्रदेश और मीडिया जगत से बिना शर्त माफ़ी मांगनी चाहिए.
— Cg Janadesh (@CJanadesh) September 29, 2021







