महासमुंद. समर्थन मूल्य पर धान खरीदी संपन्न होने के पखवाड़ेभर बाद भी समितियों में धान आज भी बंफर लिमिट से अधिक है. समितियां सूखत की मार झेल रही हैं. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य प्रदेश में एक दिसंबर से प्रारंभ हुआ था. खरीदी विपणन संघ के माध्यम से समितियों के द्वारा की जाती है. यही नहीं, विपणन संघ और समितियों के बीच 72 घण्टे के अंदर उपार्जित धान का समितियों से परिवहन हेतु अनुबंध भी होता है पर पखवाड़े भर से भी अधिक समय बीतने के बाद भी धान का उठाव नहीं हो पाया है.
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उठाव के लिए समितियों के प्रबंधक और संचालक मंडल के सदस्य डीएमओ कार्यालय को कई बार पत्र लिखकर भेंट कर चुके हैं पर नतीजा सिफर है. असामयिक वर्षा के चलते समितियों में रखे धान के खराब होने की आशंका भी है क्योंकि समितियों को दी जाने वाली सुरक्षा व्यय की राशि ऊंट के मुँह में जीरा के बराबर होती है. संग्रहण केन्द्र की अपेक्षा काफी कम राशि समितियों को प्रदाय की जाती है जिसमें लाखों बोरों धान को सहेजना मुश्किल होता है. जिसका पूरा भार विपणन संघ समितियों को थोप देता है जिससे अनावश्यक व्यय होता है.
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परिवहन ना होने से ही समितियों में हजारों क्विंटल धान पड़े हैं. कम संसाधन के बावजूद समितियां धान की पूरी सुरक्षा व्यवस्था करती है पर लगातार बारिश से धान खराब होने की संभावना स्वाभाविक है.
जयप्रकाश साहू
अध्यक्ष सहकारी कर्मचारी संघ, बागबाहरा







