सौरभ गोयल
सरायपाली. ग्राम बिरसिंगपाली के एक परिवार में करीब 40 साल पहले जमीन का आपसी बंटवारा होने के बाद से पांच भाई खेती करते हुए आ रहे हैं. अभी तक जमीन का खाता विभाजन नहीं हुआ है लेकिन धान बेचने में समस्या होने से वर्ष 2007 से सभी भाई अपने-अपने हिस्से के अनुसार पंजीयन करवा कर धान बेचते आ रहे थे. विगत वर्ष नियम में परिवर्तन के कारण ऑनलाइन खसरा नंबर को लिंक किया जाना था पर खाता विभाजन न होने के कारण चार भाई धान बेचने से इस वर्ष वंचित हो गए. उन्होंने एसडीएम को आवेदन लिखकर धान बेचने के लिए अनुमति दिए जाने की मांग की है.
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बिरसिंगपाली के खगेश्वर, बलभद्र, सेवकराम एवं विजयराम ने एसडीएम सरायपाली को आवेदन देकर पंजीयन अनुसार धान बेचने की अनुमति दिए जाने की मांग करते हुए उल्लेख किया कि गांव में खसरा नंबर 18 में रकबा 28.95 हेक्टेयर कृषि भूमि मुरलीधर पटेल पिता हरिराम वगैरह के नाम पर शामिल खाता है. उक्त जमीन का आपसी बंटवारा वर्ष 1979 में हो चुका है और तभी से अपने हिस्से के अनुसार वे खेती करते आ रहे हैं. लेकिन खाता विभाजन नहीं हुआ है. सामूहिक खाता में धान बेचने में समस्या होने पर वे 2007 से हिसाब पंजीयन करवा का धान बेचते आ रहे थे. वहीं 2017 से तहसीलदार बसना को खाता विभाजन के लिए आवेदन दिया गया है लेकिन अब तक खाता का विभाजन नहीं हुआ है. इससे उनके पास अलग-अलग ऋण पुस्तिका उपलब्ध नहीं है. वे एसडीएम एवं तहसीलदार से अनुमति लेकर धान खरीदी केंद्र बिछिया में पंजीयन अनुसार धान बेच रहे थे.
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इस वर्ष जमीन का ऑनलाइन खसरा होने से केवल जमीन के नंबरदार मुरलीधर पटेल के नाम पर ही लगभग 15 एकड़ जमीन का नवीनीकरण हुआ है. जिसके कारण 57 एकड़ जमीन के हिस्सेदार खगेश्वर, बलभद्र, सेवकराम एवं विजयराम धान बेचने से वंचित हो गए हैं. समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री ना होने से चारों परिवारों को आर्थिक व मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब चारों भाई का परिवार पानी के मोल बाजार में धान बेचने मजबूर हैं. रिश्तेदारों ने बताया कि उनके द्वारा धान खरीदी केंद्र, कलेक्टर, एसडीएम व तहसीलदार को लिखित में आवेदन देकर मांग की गई थी यदि नंबरदार की धान खरीदी की जाती है तो उक्त जमीन के हिस्सेदार चारों भाइयों का भी पंजीयन अनुसार धान खरीदी की जाए. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और केवल नंबरदार का धान खरीदी की जा रही है जबकि हिस्सेदार अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं.
#WATCH: Gujarat Chief Minister Vijay Rupani walks away when asked about reports of deaths of infants in hospitals in Rajkot and Ahmedabad. pic.twitter.com/pzDUAI231Z
— ANI (@ANI) January 5, 2020







