महासमुंद/पिथौरा. वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कोडार बांध के पास शनिवार रात एक नर हाथी की करंट से मौत हो गई. जिले में शिकारियों के जाल में फंसने से लगातार तीसरे हाथी की मौत हुई है. ज्ञात हो कि शेड्यूल-वन श्रेणी का प्राणी होने के बाद भी वन विभाग हाथियों को करंट से शिकार करने वाले शिकारियों से बचाने नाकाम रहा है. यहां बताना लाजिमी है कि जिला मुख्यालय होने के बावजूद वन विभाग को महासमुंद परिक्षेत्र संभालने के लिए एक रेंजर नसीब नहीं है, लिहाजा विगत वर्ष भर से यहां एक डिप्टी रेंजर को रेंजर के प्रभार में रखा गया है.
जानकारी के अनुसार ME-5 के नाम से जाना जाने वाला एक विशालकाय हाथी वन अफसरों की अफसरशाही के चलते शिकारियों के जाल में फंस कर मारा गया. मृतक नर हाथी की उम्र 25 वर्ष बताई जा रही है. बताया जाता है कि विगत 6 जनवरी की सुबह दो हाथी गरियाबंद से होते हुए महासमुंद वन परिक्षेत्र में प्रवेश किए थे. एक ME-1 व दूसरा ME-5 नाम का था, जो विचरण करते हुए सिरपुर की ओर जा रहै थे. इस बीच सूचना के अनुसार रात करीब 9 बजे दोनों हाथी कोडार जलाशय के सटे गांव के समीप वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक 854 से होते सिरपुर की ओर आगे बढ़ रहे थे.
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यही कोडार नहर के ऊपर से 11 KV का तार गुजरा है. जिसके तार और अज्ञात शिकारियों ने किसी वन्य प्राणी का शिकार के लिए उसी तार से हुकिंग कर जीआई तार निर्मित फंदा लगाया था. जिसमें 11 केवी विद्युत प्रभावित था. रात में जैसे ही हाथी वहां से गुजरा वह तार की चपेट में आ गया. हाथी तार से चिपकते ही चिंघाड़ा और तार के आपस में जुड़ने से वहां आग लग गई. जिसे देखकर कुछ ग्रामीण एक वनरक्षक के साथ घटनास्थल की ओर गए थे, पर तब तक हाथी की मौत हो गई.
घटना के बाद वन विभाग औपचारिकता में जुटा
महासमुंद वन परिक्षेत्र में लगातार शिकार और अवैध वन कटाई सहित अतिक्रमण की शिकायतों के बाद भी वन विभाग के अफसरों की इन्हें रोकने में कोई रुचि नहीं थी. लिहाजा वही हो गया जिसका भय था. बहरहाल, घटना की सूचना के बाद अब वह विभाग मौके पर पहुंचकर डाग स्क्वायड की मदद से शिकारी तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है.
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आनन-फानन में दफनाया गया
हाथी की करंट तार में चिपकने से हुई मौत के बाद वन अफसरों ने आनन-फानन में तीन सदस्यीय टीम से मृत हाथी का पोस्टमॉर्टम करवा कर उसे घटनास्थल पर ही गड्डा कर कर दफना दिया गया. गौरतलब है कि महासमुंद जिले में करंट से हाथी की ये तीसरी मौत है. वर्ष 2019 मे खिरसाली व किशनपुर में भी एक-एक हाथी की मौत करंट से हुई थी. इसके अलावा जिले के मुहाने पर स्थित कसडोल क्षेत्र के देवपुर वन परिक्षेत्र में भी एक हाथी की मौत दो माह पूर्व हुई थी.
रेंजरों के रहते डिप्टी रेंजरों को प्रभार
विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में पर्याप्त संख्या में रेंजर उपलब्ध हैं. बावजूद जिला मुख्यालय में विगत डेढ़ वर्षों से एक डिप्टी रेंजर को प्रभार में रखा गया है, जिससे विभागीय कार्यशैली पर प्रश्न उठना लाजिमी है.
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