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अविवाहित महिलाओं को भी गर्भपात का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट

Published on: September 29, 2022
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी महिलाओं को सुरक्षित, कानून सम्मत तरीके से गर्भपात का अधिकार है. सिर्फ विवाहित ही नहीं, अविवाहित महिलाएं भी 24 हफ्ते तक गर्भपात करा सकती है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 3-B की व्याख्या की है. कोर्ट ने साफ किया संसोधन के बाद ये कानून केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है. इससे पहले सामान्य मामलों में 20 हफ्ते से अधिक और 24 हफ्ते से कम के गर्भ के एबॉर्शन का अधिकार अब तक विवाहित महिलाओं को ही था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से 25 साल की महिला ने 23 सप्ताह के गर्भ को गिराने की इजाजत मांगी थी. महिला का कहना था कि वो आपसी सहमति से गर्भवती हुई है, लेकिन वह बच्चे को जन्म नहीं देनी चाहती क्योंकि उसके पार्टनर ने शादी से इंकार कर दिया है.

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लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस साल 16 जुलाई को याचिका ये कहते हुए खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता अविवाहित है और वह सहमति से गर्भवती हुई है. ये MTP रूल्स, 2003 के तहत किसी भी प्रावधान में नहीं आता है. बाद लड़की ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को दिए अंतरिम आदेश में महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी, लेकिन इस कानून की व्याख्या से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई जारी रखी. आज इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है. इसी फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर बिना मर्जी के बने संबंधों के चलते कोई विवाहित महिला गर्भवती होती है, तो इसे भी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत रेप माना जाना जाएगा. यानी की इस लिहाज से उसे भी अबॉर्शन कराने का अधिकार होगा.

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